राज़ी ख़ुशी मुकम्मल हुआ “जश्न-ए-आमद-ए-रसूल”, दुल्हन की तरह सजा शहर बनारस, मरकज़ के जुलूस में उमड़ी एतिहासिक भीड़, हर सु आई एक ही सदा “सरकार की आमद मरहबा”, देखे दिलकश तस्वीरे

ए0 जावेद/ ईदुल अमीन/मो0 सलीम

वाराणसी: एतिहासिक शहर बनारस ने गंगा जमुनी तहजीब की एक और मिसाल कायम किया और राज़ी ख़ुशी “जश्न-ए-ईदमिलादुन्नबी” गुज़रा। इस मुक़द्दस मौके पर शहर दुल्हन की तरफ सजा। हर सु सिर्फ एक ही सदा सुनाई दी “सरकार की आमद मरहबा”। 12 रबीउल अव्वल के शब शनिवार को मरकज़ का जुलूस इस बार तवारीखी भीड़ के साथ निकला और अपने कदीमी रास्तो से होते हुवे गुज़रा।

“जश्न-ए-आमद-ए-रसूल” का आगाज़ कदीमी संस्था मरकज़ यौमुन्न्बी कमेटी के जानिब से उठने वाले जुलूस-ए-मुहम्मदी से हुई। इस जुलूस की सदारत अल्लामा ज़कीउल्लाह के द्वारा किया गया।

इस जुलूस के कामयाबी हेतु संस्था के सदर पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री शकील अहमद “बबलू”, नवनियुक्त सेक्रेटरी हाजी महमूद, सदस्यों इमरान खान, फरीद आलम, फुरकान खान, आदिल खान, साकिब खान और बाबु नकाब आदि की मेहनत आखिर कामयाब हुई और जुलूस-ए-मुहम्मदी में एतिहासिक भीड़ दिखाई दी।

इस भीड़ ने मरकज़ यौमुन्नबी कमेटी के पिछले 74 सालो के रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया। जुलूस के पहले छोर से दुसरे छोर के बीच एक किलोमीटर की दुरी थी। जुलूस में बच्चे, बड़े, बूढ़े सभी शामिल थे और इश्क़-ए-नबी में झूम रहे थे। सभी के जुबा पर सिर्फ एक ही सदा थी “सरकार की आमद मरहबा”। जुलूस कदीमी रास्तो से आगे बढ़ता रहा और जुलूस में भीड़ बढती ही रही। जुलूस आकर मरकज़ के मंच पर खत्म हुआ और बाद तिलावत-ए-कुरआन मशहूर आलिम मौलाना ज़कीउल्लाह ने तक़रीर किया। तक़रीर में मौलाना ज़कीउल्लाह ने कहा कि नबी की सुन्नतो पर चले। दौरान-ए-तक़रीर मौलाना ने कई इसके तवारीखी उदहारण भी पेश किये।

बादस तक़रीर अंजुमनो ने अपने अपने कलाम पढ़ना शुरू किया। इनामी मुकाबले सिर्फ मरकज़ के ही स्टेज पर नही बल्कि आसपास लगे कई स्टेज पर चले। रात भर चले इस अंजुमन के कलाम के बाद सुबह अज़ान-ए-फज्र के वक्त प्रोग्राम को आराम दिया गया और सभी मस्जिदों में आशिक-ए-रसूलो ने नमाज़-ए-फज्र अदा किया।

सभी मस्जिदे नमाजियों से भरी पड़ी थी। शहर की एक एक गलियाँ रंबिरंगी रोशनी से रोशन थे। ऐसा लग रहा था कि अँधेरे को इस शब छिपने की जगह भी मयस्सर नही हो रही थी। दुल्हन की तरफ सजे नई सड़क की सजावट देखने के लिए लोग दूर दराज़ तक से आये हुवे थे और सजावट देख कर सभी के मुख से बरबस ही निकल जाता था “सुभान अल्लाह”।

रात भर चला दालमंडी व्यापार मंडल का “लंगर-ए-मुहम्मदी”, 4 हज़ार से अधिक लोगो ने खाया भरपेट खाना

दालमंडी व्यापार मंडल के द्वारा इस मुक़द्दस मौके पर “लंगर-ए-मुहम्मदी का इंतज़ाम किया था। इस लंगर में लगभग 4 हज़ार से अधिक लोगो ने लंगर का खाना खाया। न मज़हब की तलाश न धर्म की कवायद हर पेट को भरपेट खाना दालमंडी व्यापार मंडल ने उपलब्ध करवाया। जिसको शाकाहारी पसंद है उसके लिए वेज बिरयानी और मांसाहारी खाने वालो के लिए चिकेन बिरयानी लंगर में उपलब्ध थी। इस मौके पर जो भी आता लंगर की बिरयानी चख कर जाता। बिरयानी का जयका इतना लज़ीन था कि इंसान पेट की भूख़ से ज्यादा खा रहा था। इसकी लज्ज़त के चर्चे पुरे शहर में सुनने को मिले है।

बाद नमाज़ फज्र निकला पूर्वांचल का सबसे बड़ा जुलूस-ए-मुहम्मदी

ईद मिलादुन्नबी पर निकलने वाला यह पूर्वांचल का सबसे बड़ा जुलूस है। इसमें वाराणसी के साथ ही आसपास के जिलों के लोग भी शामिल होते है। इसके चलते रविवार को लाखों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। हाथों में इस्लामिक और तिरंगा झंडा था तो लबों पर सरकार की आमद मरहबा, दिलदार की आमद मरहबा, आका की आमद मरहबा, दाता की आमद मरहबा, मरहबा या मुस्तफा, मरहबा या मुस्तफा की सदाओं से पूरा शहर गूंज रहा था। इस बार ये जुलूस भी अपनी एतिहासिक भीड़ इकठ्ठा करने में कामयाब रहा। पुरे शहर का चक्रमण कर बनिया पहुचे इस जुलूस को दुआख्वानी के साथ खत्म हुआ।

बताते चले कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद (स0अ0व0) की यौम-ए-पैदाइश इस्लामिक माह रबीउल अव्वल की 12 तारीख को है। इसका ज़िक्र कई हदीस में भी है। इस मौके पर आलम-ए-इस्लाम खुशियाँ मनाता है। इस दिन को ईद मिलादुन्नबी, यौमुन्नबी या विलादत-ए-नबी के नाम से पुकारा जाता है। इस दिन को जश्न के रूप में मनाते हैं। घरों पर हरी झंडियां लगाई जाती हैं, जुलूस निकलते है और पूरे रबीउल अव्वल माह में जलसों का आयोजन होता है। सुबह निकलने वाला ये जुलूस अपने कदीमी रस्ते रेवड़ी तालाब मैदान से सुबह 7।30 बजे जुलूस-ए-मोहम्मद निकाला गया। जुलूस रविंद्रपुरी, शिवाला, मदनपुरा, मैदागिन, कबीरचौरा होते बेनियाबाग पंहुचा और बाद तक़रीर और दुआख्वानी जुलूस समाप्त हो गया। त

इसके पहले देर रात से रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, दालमंडी, नई सड़क आदि जगहों पर जगह-जगह लगे स्टेज पर अंजुमनों ने नातिया कलाम पेश किया। नबी की शान में पेश किए गए नातिया कलाम में विजेता अंजुमनों को इनाम भी दिया गया।

नई सड़क की सजावट ने मोह लिया मन, दूर दूर से देखने आये लोग

नई सड़क की सजावट ने दिल मोह लिया। एक तरफ नातियाँ कलाम कानो में शक्कर घोल रहे थे तो आँखों को सुकून ये सजावट दे रही थी। रंबिरंगी रोशनी से जगमगा रहे शहर में नई सडक से बनिया तक का पूरा रास्ता तिरंगी रोशनी से एक तरफ मुल्कपरस्ती दिखा रहा था तो दुसरे तरफ इश्क-ए-रसूल जाहिर हो रहा था। आशिक-ए-रसूल नातो पर जहा झूम रहे थे तो रोशनी उनकी खुशियों में चार चाँद लगा रही थी।

सलेमपुरा में हुई मु-ए-मुक़द्दस की जयारत

हर साल के तरह इस साल भी आदमपुर थाना क्षेत्र स्थित कोयला बाज़र के सलेमपुरा में सरकार के मु-ए-मुक़द्दस की जयरात का सिलसिला सुबह 8 बजे से मगरिब के वक्त तक चला। बताते चले कि पुरे मुल्क में मु-ए-मुक़द्दस सिर्फ दो जगहों पर है एक हज़रत बल दरगाह में और दूसरा सलेमपुरा में।

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