दिल्ली दंगे साज़िश मामले में उमर खालिद-शर्जील इमाम सहित नौ आरोपियों को जमानत से हाईकोर्ट ने किया इंकार

शफी उस्मानी

डेस्क: दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद और शर्जील इमाम समेत नौ आरोपियों की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दीं। यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कथित बड़ी साज़िश से जुड़ा है और इसमें कठोर गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (UAPA) लागू है।

जिन आरोपियों की जमानत याचिकाएँ खारिज की गई हैं, उनमें शर्जील इमाम, उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अथर खान, मीरान हैदर, शादाब अहमद, अब्दुल खालिद सैफ़ी और गुलफिशा फ़ातिमा शामिल हैं। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ ने सभी अपीलें खारिज करते हुए कहा, ‘सभी अपीलें खारिज की जाती हैं।’

गुलफिशा फ़ातिमा के वकील एडवोकेट सलीम नावेद ने एएनआई से कहा, ‘हाईकोर्ट ने सभी जमानत अर्जियाँ खारिज कर दीं। हमने मुकदमे में अत्यधिक देरी का मुद्दा उठाया था। आरोपी लगभग छह साल से हिरासत में हैं और अभी तक 1000 गवाहों की गवाही शुरू नहीं हुई। हम तुरंत सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।’

इसी मामले में पहले दिन हाईकोर्ट की एक और पीठ ने तसलीम अहमद की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। लंबी हिरासत और मुकदमे में देरी पर बहस रक्षा पक्ष ने दलील दी थी कि मुकदमे की देरी के कारण आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हैं और ट्रायल कोर्ट अब तक आरोप तय नहीं कर पाया है। उमर खालिद सितंबर 2020 से जेल में हैं और उन पर आपराधिक साज़िश, दंगा और गैरकानूनी जमावड़े समेत कई धाराएँ लगी हैं।

यह खालिद की दूसरी जमानत याचिका थी। मार्च 2022 में ट्रायल कोर्ट और अक्टूबर 2022 में हाईकोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन फरवरी 2024 में उन्होंने याचिका वापस ले ली थी।

खालिद सैफी के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पाइस ने कहा कि व्हाट्सएप ग्रुप में उनकी मौजूदगी मात्र से अपराध साबित नहीं होता। उन्होंने दलील दी, ‘मैंने केवल एक प्रदर्शन स्थल का लोकेशन साझा किया था, उसमें कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं थी। मेरी किसी भी भाषण में हिंसा की बात नहीं है, बल्कि वे गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित थे।’

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली पुलिस की ओर से कहा, ‘उमर खालिद और शर्जील इमाम देश को धर्म के आधार पर बांटने की साज़िश रच रहे थे। सभी आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में थे और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए साज़िश चल रही थी।’

इस मामले में शिफा-उर-रहमान का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और अब्दुल खालिद सैफ़ी का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने रखा।

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