‘सब गंदा है पर धंधा है’: शुभम जायसवाल की छत पर स्वीमिंग पूल और वीडीए की ‘पट्टी वाली आंखें’; सफेदपोशों के संरक्षण में खड़ा हुआ करोड़ों का काला साम्राज्य

तारिक आज़मी
वाराणसी: कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल की संपत्तियों की कुर्की ने न केवल जुर्म की दुनिया का पर्दाफाश किया है, बल्कि वाराणसी के भ्रष्ट सिस्टम की पोल भी खोल कर रख दी है। महमूरगंज जैसे पॉश इलाके में करोड़ों का तीन मंजिला आलीशान मकान अंदर ही अंदर तैयार हो गया, लेकिन कथित तौर पर ‘तेज-तर्रार’ वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) को इसकी भनक तक नहीं लगी।

- नियमों की धज्जियां: भवन की छत पर आलीशान स्वीमिंग पूल बन गया। जब पूल से पानी लीकेज की शिकायत पड़ोसियों ने वीडीए और नगर निगम से की, तो अधिकारी ‘खानापूर्ति’ करने आए।
- खानापूर्ति की हद: टीम आई, फीते से नाप-जोख की और ‘चाय-पानी’ का इंतजाम कर खामोशी से लौट गई। यह पैसे की ताकत और सफेदपोशों के संरक्षण का सबसे बड़ा उदाहरण है।

फर्श से अर्श और फिर फर्श तक: कल तक जो परिवार मामूली हैसियत रखता था और माँ लड़कियों को सिलाई सिखाकर घर चलाती थी, आज वह करोड़ों के साम्राज्य का मालिक बना बैठा था। लेकिन पाप का घड़ा भरते ही तस्वीर बदल गई:
- शुभम जायसवाल: फिलहाल फरार है, पुलिस पीछे लगी है।
- भोला जायसवाल (पिता): जेल की सलाखों के पीछे है।
- शारदा देवी (माँ): जो कल तक सिलाई सिखाती थीं, आज अदालतों के चक्कर काटकर पति की जमानत के लिए दौड़-धूप कर रही हैं।
वाराणसी में इस तरह के अवैध निर्माण और तस्करों को मिल रहा सरकारी विभाग का मौन समर्थन शहर की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। क्या अब उन वीडीए अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने अपनी आंखों पर ‘नोटों की पट्टी’ बांध रखी थी?











