राहुल के आरोपों पर भाजपा का पलटवार: “ज़हरीला झूठ बोलना और विदेश उड़ जाना ही राहुल की नीति”
राहुल गांधी के एपस्टीन फ़ाइल्स और अनिल अंबानी वाले बयान पर बीजेपी ने किया पलटवार। सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर 'ज़हरीला झूठ' बोलने और 'सड़क छाप आचरण' का आरोप लगाया।

मो0 कुमेंल
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री और उद्योगपतियों पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राहुल गांधी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘झूठ की राजनीति’ करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी पर तीखे शब्दबाण चलाए।
“ज़हरीला झूठ बोलो और विदेश उड़ जाओ”
राहुल गांधी के भाषण के कुछ ही देर बाद भाजपा की ओर से मोर्चा संभालते हुए राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी की यह पुरानी आदत बन चुकी है। त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा:
“राहुल गांधी का एक ही फॉर्मूला है— पहले सदन में ज़हरीला झूठ बोलो और फिर विदेश उड़ जाओ। वे हर बार एक नया झूठ गढ़ते हैं और जब तथ्यों की बारी आती है, तो देश छोड़कर चले जाते हैं।”
‘सड़क छाप आचरण’ का आरोप
बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए इसे संसद की गरिमा के खिलाफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद के भीतर ‘सड़क छाप आचरण’ (Roadside Behavior) कर रहा है। त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी जिस उग्रता के साथ झूठ बोल रहे हैं, वह न केवल सदन के नियमों का उल्लंघन है बल्कि लोकतंत्र के लिए भी घातक है।
आरोपों पर बीजेपी का रुख:
- तथ्यों की कमी: भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी ने एपस्टीन फ़ाइल्स और अनिल अंबानी को लेकर जो भी बातें कहीं, उनका कोई पुख्ता प्रमाण पेश नहीं किया।
- भ्रम फैलाने की कोशिश: बीजेपी ने कहा कि बजट जैसे गंभीर विषय पर चर्चा करने के बजाय राहुल गांधी अंतरराष्ट्रीय साजिशों और बेबुनियाद कहानियों के जरिए देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं।
- अदानी-अंबानी का राग: सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी के पास घिसे-पिटे आरोपों के अलावा कुछ नया नहीं है और वे बार-बार उन्हीं नामों का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए करते हैं।
इस बहस के बाद संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध और बढ़ने की संभावना है। जहाँ राहुल गांधी ने ‘भ्रष्टाचार और विदेशी दबाव’ को मुद्दा बनाया है, वहीं भाजपा इसे ‘विपक्ष की हताशा’ बता रही है।










