पिंडरा तहसील में ‘समाधान’ के बजाय हुआ ‘अपमान’? घरौनी मांगने गई मुसहर महिलाओं से SDM का कथित दुर्व्यवहार; दो कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर भड़का आक्रोश
वाराणसी: पिंडरा तहसील में 'संपूर्ण समाधान दिवस' पर हंगामा! घरौनी की मांग करने आए मुसहर समुदाय से SDM की कथित अभद्रता। हक मांगने पर कार्यकर्ताओं को किया गिरफ्तार, भारी विरोध के बाद पुलिस ने छोड़ा। पढ़ें PNN24 की ग्राउंड रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (07 फरवरी 2026): वाराणसी की पिंडरा तहसील में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ उस वक्त तनावपूर्ण हो गया जब आधा दर्जन गांवों से आए मुसहर समुदाय के लोग अपने मूलभूत अधिकारों की गुहार लगाने पहुंचे। आरोप है कि उप-जिलाधिकारी (SDM) महोदया ने न केवल ग्रामीणों की दरख्वास्त लेने से मना किया, बल्कि अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें वहां से जाने को कह दिया।

हक की आवाज़ उठाने पर ‘नज़रबंदी’ और गिरफ्तारी मौके पर मौजूद नट समुदाय संघर्ष समिति के कार्यकर्ता करन मुसहर और ज्योति प्रजापति ने जब शांतिपूर्ण ढंग से समुदाय का पक्ष रखना चाहा, तो प्रशासन ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए। कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही मुसहर समुदाय आक्रोशित हो उठा और SDM कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गया।
सामुदायिक एकजुटता के आगे झुका प्रशासन लगभग 2 घंटे तक चले शांतिपूर्ण धरने और “हक मांगना अपराध है तो हमें भी गिरफ्तार करो” के नारों के बीच प्रशासन को झुकना पड़ा। समुदाय ने स्पष्ट किया कि उन्हें कोई गुमराह नहीं कर रहा, बल्कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए स्वयं लड़ रहे हैं। भारी दबाव के बाद पुलिस ने दोनों कार्यकर्ताओं को रिहा किया।
प्रशासन की दलील और समुदाय की चिंता SDM महोदया की ओर से कहा गया कि “अभी सर्वे लॉक है, जब खुलेगा तब घरौनी मिलेगी।” वहीं ग्रामीणों को सड़क किनारे बसने की ‘नसीहत’ दी गई, जिसे समुदाय ने अपनी जड़ों से उखाड़ने की धमकी माना। मुसहर परिवारों का कहना है कि वे पांच पीढ़ियों से यहीं रह रहे हैं, अब उन्हें उजाड़कर कहाँ भेजा जाएगा?
नट समुदाय संघर्ष समिति की मांगें:
- मुसहर समुदाय की लिखित दरख्वास्त को तत्काल स्वीकार किया जाए।
- अपमानजनक और दमनकारी व्यवहार करने वाले अधिकारियों की निष्पक्ष जांच हो।
- सभी पात्र परिवारों को शीघ्र घरौनी और भूमि आवंटन सुनिश्चित किया जाए।
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो समुदाय बड़े लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।











