वाराणसी: सपा नेताओं की नज़रबंदी के बावजूद दालमंडी पहुँचे किशन दीक्षित और लालू यादव; बोले— “प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ संसद तक लड़ेंगे जंग”
वाराणसी: दालमंडी विवाद में कूदी सपा! अखिलेश यादव के निर्देश पर जा रहे प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने किया नज़रबंद। घेराबंदी तोड़ पीड़ितों के बीच पहुँचे किशन दीक्षित और लालू यादव। बोले— "लोकसभा में गूंजेगा दालमंडी का उत्पीड़न।"

शफी उस्मानी
काशी के ऐतिहासिक दालमंडी इलाके में भवनों के ध्वस्तीकरण को लेकर चल रहा विवाद अब बड़े सियासी संग्राम में तब्दील हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर आज सपा का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ितों से मिलने जाने वाला था, लेकिन प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार रात से ही सपा नेताओं को उनके घरों में नज़रबंद कर दिया।


लालू यादव का प्रहार: “समाजवादी डंडे से नहीं डरते” प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद लालू यादव ने कहा:
“प्रशासन फिलहाल तानाशाही पर उतारू है। हम लोकतांत्रिक तरीके से अपने भाई-बहनों का दुख बांटने आ रहे थे, लेकिन हमें पुलिस बल के जरिए रोकने की कोशिश की गई। पुलिस के बल पर समाजवादियों को डराया नहीं जा सकता। हम इस अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।”
किशन दीक्षित ने खोली ‘बैकडेट’ नोटिस की पोल किशन दीक्षित ने दुकानदारों से मुलाकात कर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- न्यायालय की अवहेलना: जब हाई कोर्ट का स्टे आदेश आ रहा है, तो प्रशासन भवनों को जबरन ‘जर्जर’ घोषित कर दो-तीन दिन में ढहा दे रहा है।
- कागज़ी खानापूर्ति: प्रशासन 5 दिसंबर 2025 की बैकडेट में नोटिस जारी करता है और उसे फरवरी 2026 में चस्पा कर रहा है। यह सीधे तौर पर उत्पीड़न है।
- लोकसभा में उठेगा मुद्दा: किशन दीक्षित ने प्रभावितों को आश्वासन दिया कि वे इस पूरे मामले की रिपोर्ट अखिलेश यादव को सौंपेंगे और इसे लोकसभा में उठवाने का आग्रह करेंगे।
दालमंडी में प्रशासन की कार्रवाई और सपा का मुखर विरोध बनारस की राजनीति में नई तपिश पैदा कर रहा है। एक तरफ जर्जर भवनों का तर्क है, तो दूसरी तरफ हज़ारों लोगों की रोज़ी-रोटी और छतों का सवाल। सपा के इस हस्तक्षेप के बाद अब यह मामला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने वाला है।











