जुर्म की दुनिया में लौटकर आई ‘गोली’: 1 लाख का इनामी सुपारी किलर बनारसी यादव STF मुठभेड़ में ढेर; कॉलोनाइजर हत्याकांड का था मुख्य शूटर

वाराणसी: एसटीएफ ने ढेर किया 1 लाख का इनामी शूटर बनारसी यादव! कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम हत्याकांड का था मुख्य आरोपी। चौबेपुर के बरियासनपुर में हुई मुठभेड़। पूर्वांचल के जरायम जगत का 'मिस्ट्री मैन' आखिरकार पुलिस की गोली का बना शिकार।

शफी उस्मानी

वाराणसी: जरायम जगत में एक पुरानी कहावत है— “चलाई गई गोली एक न एक दिन लौटकर वापस जरूर आती है।” वाराणसी के सारनाथ में हुए चर्चित कॉलोनाइजर महेंद्र सिंह गौतम हत्याकांड के मुख्य आरोपी और एक लाख के इनामी सुपारी किलर बनारसी यादव के साथ भी यही हुआ। मंगलवार की रात एसटीएफ (STF) के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में बनारसी यादव को ढेर कर दिया गया।

मुठभेड़ की पूरी कहानी एसटीएफ की टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि हिस्ट्रीशीटर बनारसी यादव चौबेपुर थाना क्षेत्र के बरियासनपुर रिंग रोड के पास आने वाला है। सर्विलांस और सटीक लोकेशन के आधार पर एसटीएफ ने घेराबंदी की। खुद को घिरा देख शातिर अपराधी ने एसटीएफ टीम पर फायरिंग झोंक दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली बनारसी को लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से पुलिस ने दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं।

जरायम जगत का ‘मिस्ट्री मैन’ था बनारसी गाजीपुर के खानपुर का निवासी बनारसी यादव पूर्वांचल पुलिस के लिए लंबे समय तक एक रहस्य बना रहा। सुपारी लेकर हत्याएं करने वाले इस शूटर की तस्वीर तक पुलिस के पास नहीं थी। उसकी कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी:

  • टेक्नोलॉजी से दूरी: वह कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था।
  • ठिकाने बदलना: वह कभी एक जगह नहीं ठहरता था और पारंपरिक तरीकों से संपर्क साधे रखता था।
  • साधारण हावभाव: उसका पहनावा इतना साधारण था कि कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि वह एक खूंखार सुपारी किलर है।

दर्जन भर से अधिक मुकदमे बनारसी यादव के खिलाफ वाराणसी, गाजीपुर के खानपुर, सोनभद्र के घोरावल और चोलापुर थानों में हत्या, लूट और रंगदारी जैसे दर्जन भर से अधिक मुकदमे दर्ज थे। पूर्वांचल के कई बड़े माफियाओं के इशारे पर उसने सुपारी किलिंग की वारदातों को अंजाम दिया था। सारनाथ में महेंद्र गौतम की हत्या के बाद पुलिस उसकी तलाश में जी-जान से जुटी थी।

महेंद्र सिंह गौतम की पीठ पर गोली दागने वाले शूटर को आखिरकार पुलिस की गोली ने ही शांत किया। बनारसी की मौत के बाद पूर्वांचल के कई सफेदपोश और माफियाओं के चेहरे भी बेनकाब होने की संभावना है जिनके लिए वह काम करता था।

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