वाराणसी छावनी परिषद का ‘सुपर’ कारनामा: ‘मरम्मत’ की अनुमति लेकर खड़ा करवाया जा रहा नया भवन; विदेशी फंडिंग के आरोपों के बीच रक्षा क्षेत्र की सुरक्षा दांव पर!

वाराणसी छावनी परिषद में 'मरम्मत' के नाम पर 'नवनिर्माण' का बड़ा खेल! पंप नंबर 3 के पास भवन संख्या 11/12 में नियमों की उड़ी धज्जियां। विदेशी कनेक्शन और फंडिंग के आरोपों के बीच रक्षा क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल।

मो0 सलीम 

वाराणसी: देश की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील ‘छावनी परिषद’ (Cantonment Board) में इन दिनों भ्रष्टाचार की एक ऐसी पटकथा लिखी जा रही है, जिसने रक्षा मंत्रालय के कड़े नियमों को भी ‘बौना’ साबित कर दिया है। मामला पंप नंबर 3 के पास स्थित भवन संख्या 11/12 का है, जहाँ वैध अनुमति के ‘पर्दे’ के पीछे अवैध निर्माण का खेल जोरों पर है।

मरम्मत या ‘नवनिर्माण’? आंखों पर बंधी ‘हरे कागज’ की पट्टी भवन के स्वामी रियाज़ और रहमान नामक दो भाइयों ने जर्जर हालत का हवाला देकर छावनी परिषद से अनुमति मांगी थी। नियमों के अनुसार, कैंट क्षेत्र में नए भवन के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती। लेकिन यहाँ मामला बिल्कुल उलट है:

  • तारीख 12 जनवरी: शिकायतों के दबाव के बीच मुख्य अधिशासी अभियंता ने आनन-फानन में ‘मरम्मत’ की अनुमति जारी की।
  • जमींदोज इमारत: अनुमति मिलते ही पुराने भवन को पूरी तरह ढहा दिया गया और नींव से नए सिरे से निर्माण शुरू कर दिया गया।
  • अंडरग्राउंड की तैयारी: मौके पर भारी गड्ढा खोदा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि यहाँ अवैध रूप से बेसमेंट (Underground) बनाने की योजना है।
  • प्रशासन का बहाना: स्थानीय लोग जब शिकायत करते हैं, तो परिषद का एक ही जवाब होता है— “हुजूर, हमने तो सिर्फ मरम्मत की अनुमति दी है।” सवाल यह है कि क्या ज़मीन से नई दीवारें खड़ी करना भी ‘मरम्मत’ की श्रेणी में आता है?

विदेशी कनेक्शन और सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान PNN24 न्यूज़ की पड़ताल में स्थानीय निवासियों ने नाम न छापने की शर्त पर कुछ बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

  • विदेशी नागरिकों की आवाजाही: कथित तौर पर भवन स्वामियों के एक मृतक भाई के संबंध विदेशी नागरिकों से थे, जिनका आज भी यहाँ आना-जाना बना रहता है।
  • विदेशी फंडिंग का आरोप: स्थानीय लोगों का दावा है कि इस निर्माण के पीछे विदेशों से मिलने वाली मोटी फंडिंग है। इसी रसूख के बल पर वे आपत्ति करने वालों को डराते-धमकाते हैं।
  • गोपनीयता का हनन: आरोप है कि खुद छावनी परिषद शिकायतकर्ताओं की पहचान उजागर कर देता है, जिससे सुरक्षा का संकट पैदा हो गया है।

क्या रक्षा विभाग के अधिकारी ‘विशेष प्रसाद’ के प्रभाव में इतने अंधे हो गए हैं कि उन्हें मरम्मत और नवनिर्माण का अंतर समझ नहीं आ रहा? क्या सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में विदेशी कनेक्शन वाले लोगों को नियमों के विरुद्ध जाकर निर्माण की छूट देना देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं है?

अधिशासी अभियंता कब तक रक्षा विभाग को गुमराह करने वाले जवाबी पत्र भेजते रहेंगे? फिलहाल तो मौके पर निर्माण कार्य जोरों पर है, जो इस बात का गवाह है कि यहाँ ‘नियम’ नहीं, बल्कि ‘सिक्कों की खनक’ बोल रही है।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *