‘वाराणसी पुलिस का “एक्शन”: कफ सिरप किंगपिन शुभम जायसवाल को भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू; कोर्ट की अवहेलना पर रोहनिया में एक और FIR, दुबई से गिरफ्तारी के लिए “रेड कॉर्नर” सक्रिय!’
वाराणसी: कफ सिरप कांड का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल अब घोषित होगा 'भगोड़ा'। कोर्ट की डेडलाइन खत्म, रोहनिया थाने में एक और FIR दर्ज। रेड कॉर्नर नोटिस के साथ केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय। करीबी वैभव ने खोले राज— शराब कारोबार और आलीशान होटलों में खपाई तस्करी की कमाई। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

निलोफर बानो
वाराणसी (PNN24 News): कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं। माननीय न्यायालय द्वारा दी गई 31 मार्च की समयसीमा समाप्त होने के बावजूद शुभम कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके बाद वाराणसी पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए रोहनिया थाने में उसके खिलाफ आदेश की अवहेलना की नई एफआईआर दर्ज की है और उसे आधिकारिक तौर पर ‘भगोड़ा’ घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
1. कुर्की का नोटिस और ‘रेड कॉर्नर’ का घेरा
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि शुभम की गिरफ्तारी के लिए सभी मोर्चों पर काम चल रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर: शुभम के दुबई में छिपे होने की प्रबल संभावना है, जिसके लिए रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है।
- केंद्रीय मदद: भारत सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियां भी शुभम की ‘डिजिटल और फिजिकल’ लोकेशन ट्रैक करने में जुटी हैं।
2. वैभव जायसवाल के खुलासे: हवाला और शराब का खेल
हाल ही में गिरफ्तार हुए वैभव जायसवाल (शुभम का करीबी राजदार) ने पुलिस पूछताछ में सिंडिकेट के काले साम्राज्य की कई परतें खोली हैं:
- शराब में निवेश: तस्करी से कमाए गए करोड़ों रुपयों को शुभम ने वाराणसी की 6 शराब की दुकानों में अपने करीबियों के नाम से निवेश किया है।
- हवाला और रिकवरी: वैभव के घर से पुलिस ने हवाला कारोबार से जुड़ी 22 लाख रुपये की नकदी बरामद की है।
- होटल और संपत्तियां: वाराणसी के व्यस्त जगमबाड़ी इलाके में स्थित एक आलीशान होटल और अन्य बेनामी संपत्तियों की अब एसआईटी (SIT) गहराई से जांच कर रही है।
3. सिंडिकेट की कमर तोड़ने की तैयारी
पुलिस का मानना है कि शुभम को भगोड़ा घोषित करने के बाद उसकी सभी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की (82/83 सीआरपीसी) की कार्रवाई तेज कर दी जाएगी। वैभव द्वारा दिए गए सुरागों के आधार पर वाराणसी के कुछ अन्य ‘सफेदपोश’ और बड़े व्यापारी भी पुलिस की रडार पर आ गए हैं।
📝 नजरिया:
जब कानून की लाठी पड़ती है, तो बड़े-बड़े ‘किंगपिन’ भी गलियों में छिपने की जगह ढूंढते हैं!” 31 मार्च बीत गई और शुभम साहब नहीं आए। ई तो वही बात हुई कि ‘चोरी भी और सीनाज़ोरी भी’। दुबई के बुर्ज खलीफा की छाँव में छिपकर काशी के कानून से बचना इतना आसान नहीं है। वैभव ने जो राज उगले हैं, वो बता रहे हैं कि नशा तो सिर्फ एक ज़रिया था, असली मक़सद तो शहर के होटलों और शराब के ठेकों पर कब्ज़ा करना था।”
जब सरकार पीछे पड़ जाए, तो समंदर भी छोटा पड़ जाता है। मोहित अग्रवाल साहब की टीम ने जो घेरा कसा है, उसमें अब बड़े मछलियों का फँसना तय है। जगमबाड़ी के होटलों से लेकर रोहनिया के गोदामों तक, जो पाप की कमाई बोई गई थी, उसे अब काटने का वक्त आ गया है। बस देखना ई है कि इस भगोड़े के ‘आका’ कौन हैं, जो अभी भी उसे परदे के पीछे से हवा दे रहे हैं। काशी की जनता देख रही है, और इंसाफ होकर रहेगा!”
📝 पुलिस के नजरो से दूर या फिर एक पैनी नज़र इनकी भी गतिविधियों पर है :
वैसे इन सबके बीच कुछ पत्रकार अचानक शुभम के नजदीकी होने के बाद से करोडपति बने है, कई तस्वीरे ऐसे पत्रकारों की भी वायरल हुई जिसमे वह शुभम के साथ मौजूद है। यही नहीं कुछ पत्रकार दुबई की सैर करके भी वापस आये है। ऐसे में जब पुलिस ने वैभव जयसवाल की कुंडली अगर विधिवत खंगाल दिया तो ये सफेदपोश पत्रकार भी बेनकाब हो जायेगे। ऐसा नही शुभम के करीबी पुलिस विभाग के नहीं है। वाराणसी का पटाखा किंग भी इस जांच की आंच में आ सकता है। रिश्ते कहा जाता है रिश्ते ही होते है। फिलहाल तो वह सफेदपोश और पटाखा किंग इस पकड़ से बाहर है। मगर पुलिस की बढती पकड़ जांच की आंच में उनके साम्राज्य तक पहुच पाती है, या फिर वो मैनेज कर लेते है ये देखने वाली बात होगी।।











