‘वाराणसी का “मदरसा माफिया”: सराय हड़हा में शिक्षा के नाम पर करोड़ों की डकैती; कागजों पर “खानदान” को सरकारी तनख्वाह, ज़मीन पर बना डाला कमर्शियल कटरा; धमकी देने वालों सुन लो— “कलम रुकती नहीं, और हम डरते नहीं”!’
वाराणसी विशेष: सराय हड़हा के मदरसा मजीदिया में 'शिक्षा माफिया' का नंगा नाच! करोड़ों का सरकारी फंड डकारने का आरोप, कागजों पर परिवार के लोग शिक्षक और हकीकत में मस्जिद के अंदर चल रहा मदरसा। मदरसे की जमीन पर कटरा बनवाकर बेचने का सनसनीखेज खुलासा। क्या प्रशासन तोड़ेगा आलमगीर और शाहबाज़ खान का यह 'गोरखधंधा'? PNN24 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): माफिया शब्द सुनते ही अक्सर ज़हन में बंदूक और ड्रग्स की तस्वीर उभरती है, लेकिन वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र स्थित सराय हड़हा में एक ऐसा ‘माइनॉरिटी एजुकेशन माफिया’ सक्रिय है जो समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है। यहाँ ‘मदरसा मजीदिया’ के नाम पर सरकारी धन की ऐसी बंदरबांट हो रही है कि सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। शिक्षा के नाम पर चल रहे इस ‘धंधे’ में न केवल सरकारी जमीनों का सौदा हुआ, बल्कि अपनों को ‘रेवड़ी’ की तरह सरकारी नौकरियां भी बांटी गईं।
1. मस्जिद में मदरसा, ज़मीन पर ‘कटरा’
सरकारी दस्तावेजों में मदरसा मजीदिया भवन संख्या CK 40/25-B पर संचालित दिखाया गया है। लेकिन PNN24 की तफ्तीश में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है:
- अवैध निर्माण: मदरसे की आवंटित भूमि पर आलीशान कमर्शियल कटरा बनवाकर उसे ऊँचे दामों पर बेच दिया गया। इस सौदे की मोटी रकम सीधे मदरसा कमेटी के कर्ताधर्ता आलमगीर साहब की जेब में गई।
- मस्जिद का सहारा: जिस मदरसे के लिए सरकार भवन का पैसा देती है, वह असल में पास की मस्जिद के प्रथम तल पर दो कमरों में सिमटा हुआ है।
2. ‘पारिवारिक’ भर्ती और तनख्वाह का घोटाला
मदरसे में नियुक्तियों का खेल किसी ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ जैसा है:
- रिश्तेदारी का कोटा: यहाँ नियुक्त अधिकतर शिक्षक और कर्मचारी आलमगीर साहब के परिवार के सदस्य हैं। कागजों पर ये ‘आलिम’ और ‘मुंशी’ बनकर मोटी सरकारी तनख्वाह उठा रहे हैं, जबकि असल में पढ़ाने का काम 4-5 हज़ार रुपये के प्राइवेट कर्मचारी कर रहे हैं।
- विदेशी विज्ञापन: नियुक्तियों में धांधली का आलम यह है कि वाराणसी के स्थानीय अखबारों के बजाय दूसरे राज्यों के गुमनाम अखबारों में विज्ञापन निकलवाकर गुपचुप तरीके से अपनों को भर्ती कर लिया गया।
- कंप्यूटर घोटाला: सरकारी फंड से आए कंप्यूटर केवल ‘जांच’ के समय दर्शन देते हैं, बाकी समय वे मैनेजर साहब के घर की शोभा बढ़ाते हैं।
3. ‘कलम और सांसें’ रोकने की धमकी?
इस गोरखधंधे की बागडोर फिलहाल आलमगीर के पुत्र शाहबाज़ खान के हाथों में है। सूत्रों के मुताबिक, जब PNN24 ने इस घोटाले की परतों को उधेड़ना शुरू किया, तो शाहबाज़ खान ने धमकी भरे लहजे में कहा कि “पैसा खर्च होने पर कलम ही नहीं, सांसें भी बंद हो जाती हैं।” PNN24 का दो टूक जवाब: शाहबाज़ खान, याद रहे कि ‘डरने वाले अगली गली के आखिरी नुक्कड़ पर रहते हैं।’ न हम लखनऊ के फोन से दबने वाले हैं और न ही तुम्हारी धमकियों से। यह तफ्तीश तब तक जारी रहेगी जब तक एक-एक पैसे का हिसाब सार्वजनिक नहीं हो जाता।
📝 काका की हर बात पर नजरिया देने की चुल
काका आज कल लगता है फिलासफर हो चले है, वह हर मुद्दे पर एकदम्मे लाठिया लेकर चढ़ जाते है कि उनका नज़रिया लो, भले जबरिया लो, मगर लो, तो उनका भी नज़रिया पढ़ ले भाई:
“बबुआ, जब ‘दीन’ की तालीम देने वाली जगह ‘दलाली’ का अड्डा बन जाए, तो समझो कि क़यामत करीब है!”
आज रात सराय हड़हा के इस ‘मदरसा माफिया’ की दास्तान सुनकर काका का चेहरा गुस्से से लाल था।
काका बोले: “बबुआ, हमने हत्या करने वाले माफिया देखे, ज़मीन कब्जाने वाले देखे, पर ये ‘शिक्षा माफिया’ तो सबसे नीच किस्म के हैं। बच्चों के भविष्य का पैसा डकार कर अपने खानदान को पालना कौन सी शराफत है? कागजों पर प्रोफेसर और हकीकत में मस्जिद के कोने में दो चटाई बिछाकर मदरसा चलाना… ई तो सीधे-सीधे खुदा और सरकार, दोनों को धोखा देना है।”
मैंने पूछा— “काका, ये धमकियों का क्या चक्कर है?”
काका का जवाब: “बबुआ, जिसके पास ‘हराम’ का पैसा होता है, उसे लगता है कि वो मौत को भी खरीद लेगा। शाहबाज़ खान जैसे लोग भूल रहे हैं कि हम लोगो के शरीर में क्रांतिकारियों का खून दौड़ रहा है। यहाँ कलम की ताकत सच्चाई से आती है, तिजोरी से नहीं। आलमगीर साहब बीमार हैं, हम दुआ करते हैं कि वो ठीक हों ताकि जब जांच बैठे, तो वो जवाब दे सकें कि मदरसे की ज़मीन पर कटरा कैसे तन गया? काशी की अड़ियों पर लोग कह रहे हैं— ‘साहब, मदरसे को जागीर मत समझो, वरना जब कानून का हंटर चलेगा तो सात पुश्तें हिसाब देंगी’।”
📊 मदरसा मजीदिया: घोटाले का कच्चा चिट्ठा (Report Card of Corruption)
| घोटाले का बिंदु | विवरण | वर्तमान स्थिति |
| भवन संख्या CK 40/25-B | मदरसे की मूल जगह पर कमर्शियल कटरा (दुकानें) निर्मित | बेचकर मुनाफा कमाया गया |
| वर्तमान संचालन | सराय हड़हा मस्जिद के प्रथम तल पर | अवैध संचालन |
| स्टाफ की नियुक्ति | परिवार के सदस्यों की फर्जी डिग्री पर भर्ती | सरकारी खजाने की लूट |
| विज्ञापन प्रक्रिया | अन्य प्रदेशों के छोटे अखबारों में गुपचुप प्रकाशन | नियम विरुद्ध भर्ती |
| संसाधन (कंप्यूटर आदि) | सरकारी बजट का गबन, पुराने कबाड़ से खानापूर्ति | जांच का विषय |











