‘वाराणसी की “स्मार्ट पार्किंग” या वसूली का अड्डा? बेनिया और मैदागिन में पेटी ठेकेदारों की “जागीर” बनी सड़कें; जनता जाम में बेहाल, साहब लोग कमीशन के “सुरूर” में मालामाल!’
वाराणसी विशेष: स्मार्ट सिटी की पार्किंग बनी बनारसियों के लिए 'बवाल-ए-जान'! बेनिया से मैदागिन तक अवैध वसूली और पेटी ठेकेदारों का राज। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार, जीप में मोबाइल खेलते पुलिसकर्मी और सोता हुआ नगर निगम प्रशासन। क्या 'स्मार्ट' के नाम पर जनता की जेब काटने की खुली छूट है? PNN24 की विशेष पड़ताल।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): धर्म और संस्कृति की नगरी काशी को ‘स्मार्ट’ बनाने का दावा करने वाले नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने आम बनारसियों की ज़िंदगी को ‘स्मार्ट पार्किंग’ के नाम पर जंजाल बना दिया है। मैदागिन का टाउन हॉल हो या बेनिया बाग, इन पार्किंग स्थलों पर जो खेल चल रहा है, उसने न केवल यातायात व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि भ्रष्टाचार की एक नई इबारत लिख दी है।
1. पेटी ठेकेदारी: ‘बैठे-बिठाए’ मोटा मुनाफा
सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम ने जिन संस्थाओं को पार्किंग का टेंडर दिया, वे खुद काम करने के बजाय इसे ऊँचे दामों पर ‘पेटी ठेकेदारों’ को बेच चुके हैं। अब यह ‘पेटी ठेकेदार’ अपनी मोटी रकम निकालने के लिए ‘सब गंदा है पर धंधा है’ की तर्ज पर जनता को लूट रहे हैं।
2. मैदागिन: कोतवाली गेट तक वाहनों का ‘रेला’
मैदागिन टाउन हॉल पार्किंग के गेट पर सुबह होते ही ‘पार्किंग फुल’ का बोर्ड लटका दिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है असली खेल:
- दलालों की फौज: पार्किंग के बाहर लड़कों की फौज खड़ी रहती है जो मनमाना चार्ज वसूलते हैं।
- सड़क पर कब्जा: गाड़ियों को एक-एक कर अंदर भेजने के नाम पर लाइन कोतवाली के पश्चिमी गेट तक पहुँच जाती है, जिससे आधी सड़क पार्किंग ठेकेदार की व्यक्तिगत जागीर बन जाती है।
- दलाली का अड्डा: गेट पर ही होटल दिलाने और दर्शन करवाने वाले दलालों का जमघट लगा रहता है, जिससे स्थानीय निवासियों का चलना दूभर हो गया है।
3. बेनिया बाग: मोबाइल खेलते सिपाही और ‘लफंगई’ का अड्डा
बेनिया बाग पार्किंग की स्थिति और भी बदतर है। यहाँ स्मार्ट सिटी के ‘सुपर स्मार्ट’ अधिकारियों ने ठेकेदारों को लूट की खुली छूट दे रखी है:
- पुलिस की सुस्ती: ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी जनता को जाम में तड़पता छोड़ जीप के अंदर मोबाइल पर गेम खेलते या रील देखते नज़र आते हैं।
- सुरक्षा से खिलवाड़: बिना किसी सुरक्षा मानक के ऊँचे-ऊँचे झूले लगवाकर ठेकेदार अपनी जेब भर रहा है।
- बाल उद्यान की दुर्दशा: जो पार्क बच्चों के लिए मुफ्त था, उसे ‘शादी घर’ में तब्दील कर दिया गया है। चर्चा है कि एक-एक बुकिंग की मोटी रकम अधिकारियों की जेब तक पहुँचती है।
4. नगर आयुक्त की ‘खामोशी’
हैरानी की बात यह है कि शहर के बीचों-बीच चल रहे इस गोरखधंधे पर नगर आयुक्त और स्मार्ट सिटी के आला अधिकारियों ने अपनी आँखों पर ‘बढ़िया क्वालिटी’ की पट्टी बाँध रखी है। शायद उनकी प्राथमिकता जनसेवा के बजाय किसी बड़े जिले में मलाईदार पोस्टिंग पाना है।

आज दोपहर मैदागिन और बेनिया के पार्किंग विवाद पर अस्सी घाट की अड़ी पर काका का पारा सातवें आसमान पर था। काका को विशेष ‘चुल’ सवार हो जाती है अपनी प्रतिक्रियिया देने की
काका बोले: “बबुआ, ई ‘स्मार्ट’ के नाम पर ‘सफाई’ चल रही है— बनारसियों की जेब की सफाई! हम सड़क पर चलने का टैक्स देते हैं और ठेकेदार सड़क को अपने बाप की बपौती समझकर वहाँ गाड़ियों की कतार लगवा देता है। मैदागिन में कोतवाली के सामने ही कानून की धज्जियाँ उड़ रही हैं, पर मजाल है कि कोई बोले। पुलिस वाले जीप में मोबाइल खेल रहे हैं, जैसे जाम हटाना उनका नहीं, बल्कि यमराज का काम हो।”
मैंने पूछा— “काका, क्या नगर आयुक्त को ये सब नहीं दिखता?”
काका का जवाब: “दिखता सब है बबुआ, पर ‘गांधी छाप’ पट्टी जब आँखों पर बँध जाए तो सब धुंधला हो जाता है। बेनिया बाग में बच्चों का पार्क शादी घर बन गया है। जहाँ किलकारियां गूँजनी चाहिए थीं, वहाँ अब जेनरेटर का शोर और ठेकेदार की लफंगई गूँज रही है। साहब बहादुर लोग तो अगले जिले की सेटिंग में लगे हैं। काशी की अड़ियों पर लोग कह रहे हैं— ‘स्मार्ट सिटी का चश्मा उतारकर कभी पैदल सड़क पर निकलिए साहब, तब पता चलेगा कि जनता आपको कितनी दुआएं दे रही है’।”
📊 स्मार्ट पार्किंग का ‘कमीशन’ गणित (Investigation Summary)
| स्थान | समस्या | प्रशासनिक स्थिति |
| मैदागिन टाउन हॉल | अवैध लाइन, मनमाना चार्ज, दलालों का कब्जा | नगर निगम ‘मौन’ |
| बेनिया बाग | अवैध इवेंट्स, सुरक्षा विहीन झूले, बाल उद्यान की बर्बादी | अधिकारी ‘नज़रअंदाज़’ |
| ट्रैफिक पुलिस | ड्यूटी के दौरान मोबाइल का उपयोग, जाम में लापरवाही | जवाबदेही ‘शून्य’ |
| पेटी ठेका | मूल टेंडर से अधिक कीमत पर उप-ठेकेदारी | शुद्ध ‘मुनाफाखोरी’ |














