‘नगर आयुक्त साहब! बेनिया पार्क में सजेगी “समाजवादी बकरा मार्केट”? ठेकेदार राजा तिवारी पर नियमों को बेचने और मोटी रकम की वसूली का गंभीर आरोप!’
वाराणसी: बेनिया पार्क बना भ्रष्टाचार का अड्डा? नियमों को ताक पर रखकर 'समाजवादी बकरा मार्केट' लगाने की तैयारी। ठेकेदार राजा तिवारी और सपा नेताओं के बीच लाखों की डील का आरोप। स्मार्ट सिटी के साहबों की चुप्पी पर उठे सवाल। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी स्मार्ट सिटी द्वारा निर्मित बेनिया पार्क (राजनारायण पार्क) इन दिनों अपनी दुर्दशा और रेवेन्यू जेनरेशन के नाम पर हो रही कथित ‘लूट’ को लेकर सुर्खियों में है। आरोप है कि पार्क और पार्किंग का संचालन कर रहे ठेकेदार राजा तिवारी को स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की मौन सहमति से पार्क पर अघोषित मालिकाना हक मिल गया है।
1. पार्क में नियम विरुद्ध गतिविधियाँ
स्मार्ट सिटी द्वारा करोड़ों की लागत से बनाए गए इस पार्क में कई ऐसी गतिविधियाँ हो रही हैं जो नियमों के विरुद्ध हैं:
- असुरक्षित झूले: पार्क के एक हिस्से में बिना किसी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के ऊँचे-ऊँचे झूले लगा दिए गए हैं।
- अवैध निर्माण और बिक्री: पार्किंग के बाहर खुले क्षेत्र में एक अस्थाई दुकान बनाकर उसे बेच दिया गया है, जो अनुबंध के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
- होटल दलाली का अड्डा: सूत्रों के अनुसार, पार्किंग के अंदर नई सड़क से औरंगाबाद मार्ग पर स्थित दो होटलों के दलाल सक्रिय रहते हैं, जो पर्यटकों को होटल ले जाते हैं और ठेकेदार के कारिंदे इसमें कमीशन लेते हैं।
2. ‘समाजवादी बकरा मार्केट’ की बड़ी डील?
सबसे चौंकाने वाली जानकारी ‘बकरा मार्केट’ को लेकर सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि:
- भाजपा शासन में निर्मित इस पार्क के अंदर ‘समाजवादी बकरा मार्केट’ लगाने की पूरी तैयारी है।
- इसके लिए कुछ स्थानीय सपा नेता और ठेकेदार राजा तिवारी के बीच बैठकों का दौर जारी है।
- दालमंडी चौड़ीकरण विवाद से जुड़े एक नेता द्वारा इस बाज़ार के लिए स्मार्ट सिटी को ‘मैनेज’ करने हेतु 5 लाख रुपये एडवांस देने की चर्चा है, जो कुल सौदे का महज़ 20 प्रतिशत बताया जा रहा है।
3. स्मार्ट सिटी प्रशासन की चुप्पी
आरोप है कि स्मार्ट सिटी के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी आँखें मूंदे बैठे हैं। क्या यह चुप्पी किसी ‘विशेष सेवा सत्कार’ का परिणाम है? पार्क में महिलाओं और पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें पहले भी वायरल हो चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती रही है।
📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, जब पार्क ‘इंसाफ’ के लिए नहीं, ‘कमीशन’ के लिए चलने लगे, तो समझो कि स्मार्ट सिटी की चमक में भ्रष्टाचार की कालिख लग गई है; बकरा मार्केट लगेगा या नहीं, ई तो वक्त बताएगा, पर साख तो अभी से कट रही है!”
आज बेनिया पार्क की इस ‘बकरा मार्केट’ वाली डील पर काका ने रजनीगंधा महज़ 5 मिनट में थूक डाला।
काका बोले: “बबुआ, बेनिया बाग का इतिहास राजनारायण जी के नाम से जुड़ा है, पर आज वहां ‘राजा’ का राज चल रहा है। भाजपा के बनाए पार्क में ‘समाजवादी बकरा मार्केट’ की खिचड़ी पक रही है, ई तो गजबे राजनीति है! ठेकेदार साहब को खुली छूट मिली है—झूला लगाओ, दुकान बेचो या दलाली करवाओ। नगर आयुक्त साहब क्या वाकई इससे बेखबर हैं या फिर ‘हरे पत्तों की पट्टी’ ने सबकी दृष्टि धुंधली कर दी है?”
मैंने पूछा— “काका, क्या जनता को इसका नुकसान होगा?”
काका का जवाब: “बबुआ, नुकसान तो जनता का ही है। पार्क सुकून के लिए होता है, बाज़ार और दलाली के लिए नहीं। जब पार्क की ज़मीन पर सौदेबाजी होने लगे, तो गरीब आदमी कहाँ जाएगा? काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, अगर बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो हरियाली की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए’।”










