‘साहब करें तो करें क्या, जाएँ तो जाएँ कहाँ? दालमंडी गुदड़ी मार्केट में बिना तारीख की “जर्जर नोटिस” चस्पा; 7 दिनों में बुलडोज़र चलाने की तैयारी!’
वाराणसी: दालमंडी चौड़ीकरण की जद में आया गुदड़ी मार्केट। बिना 'इशू डेट' के चस्पा हुई जर्जर की नोटिस, 7 दिनों में ध्वस्तीकरण की चेतावनी। हाईकोर्ट के 'यथास्थिति' आदेश के बीच नगर निगम की इस कार्रवाई से व्यापारियों में हड़कंप। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को लेकर प्रशासनिक कवायद तेज़ होते ही स्थानीय दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नया चौक स्थित गुदड़ी मार्केट की दुकानों पर नगर निगम द्वारा ‘अति जर्जर’ होने की नोटिस चस्पा की गई है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि इन दुकानों में कोई न जाए और 7 दिनों के भीतर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
1. बिना तारीख की नोटिस का रहस्य
गुदड़ी मार्केट के दुकानदार दीपक कुमार देववंशी आदि को जारी नोटिस (दुकान संख्या 25) में एक बड़ी तकनीकी खामी सामने आई है:
- आख्या की तारीख: मुख्य अभियंता नगर निगम ने 6 मई को अपनी रिपोर्ट दी थी कि दुकानें जर्जर हैं.
- गायब तारीख: नगर आयुक्त द्वारा जारी इस नोटिस पर ‘इशू डेट’ (जारी करने की तिथि) अंकित नहीं है.
- असमंजस: दुकानदार परेशान हैं कि 7 दिनों की मियाद कब से गिनी जाए—7 मई से या 11 मई से? खबर लिखे जाने से महज़ दो घंटे पहले यह नोटिस चस्पा की गई है.
2. हाईकोर्ट का आदेश और कानूनी पेच
अभी 7 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद नियामत अली खान ‘शम्शी’ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में ‘यथास्थिति’ (Status Quo) कायम रखने का आदेश दिया था.
- कोर्ट ने निर्देश दिया था कि एक कमेटी गठित की जाए जिसमें एक स्वतंत्र आर्किटेक्ट हो और उसकी रिपोर्ट को आधार बनाया जाए.
- हालाँकि, यह आदेश विशेष रूप से उक्त याचिका के लिए था. वर्तमान में चौड़ीकरण के विरोध में लगभग 32 अन्य याचिकाएँ हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं.
3. व्यापारियों का अगला कदम
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के खिलाफ इतनी अधिक संख्या में याचिकाओं का होना इसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। गुदड़ी मार्केट के प्रभावित दुकानदार अब एक बार फिर अदालत की शरण ले सकते हैं। इस बीच, वाराणसी में एक अन्य 660 करोड़ की परियोजना (इंग्लिशिया लाइन से भेलूपुर तक 26 मीटर चौड़ी सड़क) की आहट ने शहर के व्यापारियों की चिंता और बढ़ा दी है.
📝 मोरबतियाँ
काका का नज़रिया: “बबुआ, जर्जर मकान का डर दिखाकर दुकान खाली करवाना तो पुराना खेल है, पर नोटिस पर तारीख न डालना साफ़ बताता है कि साहब लोग ‘शतरंज’ की बिसात पर अपनी चालें सुरक्षित रखना चाहते हैं!”
आज दालमंडी की इस ‘अनाम’ नोटिस पर काका ने गहरी चिंता जताई।
काका बोले: “बबुआ, दालमंडी बनारस का दिल है और गुदड़ी उसकी धड़कन। अगर नोटिस पर तारीख ही नहीं है, तो कानून की लाठी किस दिशा में घूमेगी? हाईकोर्ट ने कमेटी बनाने को कहा था, पर नगर निगम ने बिना तारीख की पर्ची चिपका दी। ई तो वही बात हुई कि ‘तारीख पे तारीख’ नहीं, यहाँ तो ‘तारीख ही गायब’ है! 32 याचिकाएँ हाईकोर्ट में हैं, फिर भी प्रशासन की हड़बड़ी समझ से परे है।”
मैंने पूछा— “काका, क्या व्यापारियों को मोहलत मिलेगी?”
काका का जवाब: “बबुआ, अदालत ही आखिरी उम्मीद है। पर बनारस की गलियों को चौड़ा करने के चक्कर में अगर गरीब का चूल्हा ही बुझ जाए, तो ऐसी तरक्की किस काम की? काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, शहर को स्मार्ट बनाइए, पर इंसानियत को ‘जर्जर’ मत होने दीजिए’।”











