‘वाराणसी नगर निगम का “सेलेक्टिव” चश्मा: गरीबों के आशियाने पर चला बुल्डोज़र, पर कचहरी पुलिस चौकी की “प्रचंड जर्जर” दीवार से कब हटेगा पर्दा?’

वाराणसी: नगर निगम का 'जर्जर' प्रेम या गरीबों पर वार? जालपा रोड और दालमंडी में बुल्डोज़र चलाकर गरीबों को किया बेघर, लेकिन कचहरी पुलिस चौकी की 'प्रचंड जर्जर' बाउंड्री पर क्यों नहीं पड़ती अधिकारियों की नज़र? वीआईपी मार्ग पर मौत को दावत दे रही झूलती दीवार। PNN24 की विशेष तीखी रिपोर्ट।

तारिक आज़मी

वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी नगर निगम इन दिनों जर्जर भवनों को लेकर ‘अत्यधिक चिंतित’ नज़र आ रहा है। लेकिन इस चिंता के केंद्र में कौन है, यह एक बड़ा सवाल है। दालमंडी से लेकर जालपा रोड तक प्रशासन ने जर्जर भवनों की तलाश कर उन्हें जमींदोज कर दिया है, मगर ठीक उसी शहर में ‘सरकारी जर्जरता’ को अनदेखा किया जा रहा है।

1. गरीबों के सिर से छिना आशियाना

आज जालपा रोड पर नगर निगम ने जर्जर करार देकर कई गरीब किरायेदारों के आशियानों पर बुल्डोज़र चलवा दिया। सवाल यह उठता है कि जिस इंसान के पास भवन मरम्मत के पैसे नहीं हैं, वह इस चिलचिलाती धूप में अपने परिवार को लेकर कहाँ जाएगा? क्या ब्यूरोक्रेट्स ने यह सोचा कि इन खाली जमीनों पर अब भवन स्वामी आलीशान हवेलियाँ खड़ी करेंगे, लेकिन गरीब कहाँ बसेगा?

2. कचहरी पुलिस चौकी: मौत को दावत देती दीवार

एक ओर गरीबों के घर तोड़े जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कैंट थाना क्षेत्र की ‘कचहरी पुलिस चौकी’ की बाउंड्री वॉल ‘प्रचंड जर्जर’ होकर झूल रही है।

  • वीआईपी मार्ग की अनदेखी: इस मार्ग से रोज़ाना बड़े अधिकारी और वीआईपी गुज़रते हैं, लेकिन किसी की नज़र इस झुक कर ‘सलामी’ देती दीवार पर नहीं पड़ी।
  • दुर्घटना का इंतज़ार: यह चारदीवारी कभी भी किसी बड़ी घटना या दुर्घटना का कारण बन सकती है। तस्वीरें गवाह हैं कि ईंटें और सीमेंट कैसे अपना साथ छोड़ चुके हैं।

3. जन सहयोग और प्रशासनिक उदासीनता

पुलिस अक्सर ‘जन सहयोग’ की बात करती है, लेकिन क्या कचहरी चौकी प्रभारी आज तक इतना जन समर्थन नहीं जुटा पाए कि इस खतरनाक बाउंड्री को ठीक करवा सकें? अगर मरम्मत मुमकिन नहीं थी, तो सुरक्षा के लिहाज़ से इसे उतरवा ही दिया गया होता।


📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

Tariq Azmi (तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, नगर निगम का कानून भी बड़ा अजब है; गरीब की झोपड़ी जर्जर दिखे तो बुल्डोज़र तैयार, और सरकारी दीवार झूलती रहे तो अधिकारी आँखें मूंद कर ‘वीआईपी’ गाड़ियों में सवार!”

आज वाराणसी की इस ‘सेलेक्टिव’ कार्रवाई पर काका का गुस्सा सातवें आसमान पर था।

काका बोले: “बबुआ, जर्जर भवन गिराना गलत नहीं है, पर सिर्फ गरीबों को निशाना बनाना कहाँ का इंसाफ है? दालमंडी और जालपा रोड पर गरीब पिस रहा है। साहब लोगों को कचहरी पुलिस चौकी की वो दीवार नहीं दिखती जो राहगीरों के सिर पर गिरने को तैयार है? शायद प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागेगा।”

मैंने पूछा— “काका, क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं होगी?”

काका का जवाब: “जानकारी सबको है बबुआ, पर नीयत की कमी है। जिस रास्ते से रोज़ सायरन बजाती गाड़ियाँ निकलती हैं, वहाँ की दीवार झूल रही है। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, बुल्डोज़र की ताकत सिर्फ गरीबों के लिए मत रखिए, कभी इन खतरनाक सरकारी ढांचों पर भी ध्यान दीजिये’। अगर कल कोई अनहोनी हुई, तो कौन ब्यूरोक्रेट इसकी ज़िम्मेदारी लेगा?”

PNN24 News की विशेष अपील: नगर आयुक्त महोदय, दुर्घटना होने से पहले इस जर्जर बाउंड्री की सुध लें।

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