बनारस का अनोखा मिजाज: गंगा-जमुनी तहजीब के साए में हुआ एक्सिस बैंक की नई शाखा का आगाज
वाराणसी के पीलीकोठी में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश करते हुए एक्सिस बैंक की नई शाखा का उद्घाटन किया गया। जहाँ समाजसेवक शैलेश चन्द्र वर्मा ने लक्ष्मी-गणेश पूजन कर दीप प्रज्वलित किया, वहीं शहर मुफ़्ती मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी और अंजुमन इन्तेज़मियां मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने संयुक्त रूप से फीता काटकर बैंक की तरक्की की दुआएँ दीं।

महविश कुरैशी
वाराणसी। धर्म, अध्यात्म और अनूठी संस्कृति की नगरी काशी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बनारस का ताना-बाना कितना मजबूत और खूबसूरत है। वाराणसी के पीलीकोठी इलाके में आज एक्सिस बैंक (Axis Bank) की नई शाखा का उद्घाटन बेहद सादगी और दिल छू लेने वाली ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ के साथ किया गया।

पूजा, दीप प्रज्वलन और दुआओं का संगम
कार्यक्रम की शुरुआत समाजसेवक शैलेश चन्द्र वर्मा के द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके बाद, उन्होंने विधि-विधान से माँ लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश का पूजन किया और बैंक की सफलता व समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
वहीं दूसरी ओर, भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाते हुए शहर मुफ़्ती मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी और ज्ञानवापी मस्जिद की देख-रेख करने वाली संस्था अंजुमन इन्तेज़मियां मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने संयुक्त रूप से फीता काटकर आधिकारिक तौर पर शाखा का उद्घाटन किया। फीता काटने के बाद मुफ़्ती बातिन नोमानी ने विशेष तौर पर ब्रांच मैनेजर अकरम अली और उनकी पूरी टीम को गले मिलकर बधाई दी और बैंक की तरक्की के लिए दुआएं मांगी।
स्थानीय लोगों को मिलेगी बेहतर और सस्ती बैंकिंग सेवा
इस उद्घाटन समारोह में बैंक के कलस्टर हेड मोहम्मद अश्फी, ऑप्स हेड प्रियंका सिंह, आकाश कुमार, मुहम्मद रज़ा समेत बैंक के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
शाखा के उद्घाटन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ब्रांच मैनेजर अकरम अली ने कहा:
“हमारा बैंक अपनी सबसे अच्छी, सुरक्षित और सस्ती सेवाओं के लिए जाना जाता है। पीलीकोठी और उसके आसपास के व्यापारिक व रिहायशी इलाके के ग्राहकों को उनके घर के नजदीक ही बेहतरीन और आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से ही इस नई शाखा की शुरुआत की गई है।”
यह आयोजन न केवल एक्सिस बैंक के विस्तार को दर्शाता है, बल्कि बनारस की उस साझा विरासत (गंगा-जमुनी तहजीब) को भी मजबूती देता है, जहाँ हर शुभ काम की शुरुआत मिलकर, एक-दूसरे के विश्वास और दुआओं के साथ की जाती है।












