औषधियों की खान रसभरी जामुन नदारद रही इस वर्ष

बापू नंदन मिश्र

रतनपुरा (मऊ) बरसात का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाले काले जामुन अपने बेहतरीन स्वाद एवं औषधीय गुणों के कारण सबके प्रिय होते हैं। यूं तो गर्मी के बाद जैसे ही वर्षा शुरू होती है प्रकृति द्वारा प्रदत्त कई महत्वपूर्ण फल गांव से लेकर बाजारों तक अपनी उपस्थिति से लोगों को आकर्षित करने लगते हैं। इसमें फलों के राजा आम के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्थान जामुन का आता है।

ऐसा हो भी क्यों न ! ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध होने वाले स्वादिष्ट जामुन के फल केवल एक फल ही नहीं बल्कि अपने औषधीय गुणों के कारण इन्हें अमृत समान माना जाता है। किंतु दुर्भाग्यवश इस वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में जामुन के पेड़ पर फल लगे ही नहीं इसे पर्यावरण प्रदूषण कहें या कोई अन्य कारण, जो भी हो लेकिन जामुन के प्रेमियों के लिए यह बहुत ही दुखदाई है। क्योंकि इस समय लोग आम के साथ-साथ जामुन के स्वादिष्ट फलों के दीवाने होते हैं। क्षेत्र के थलईपुर,पहसा, हलधरपुर , रतनपुरा  चकरा,सहित अन्य समीपवर्ती गाँवों में सैकड़ों की संख्या में जामुन के पेड़ है ।थलईपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास स्टेट हाईवे के किनारे  ही एक विशाल जामुन का पेड़ है। जहां इस मौसम में दूर-दराज के गांवों से भी जामुन के शौकीन जामुन खाने पहुंचते हैं। किंतु इस बार सभी को निराशा हाथ लग रही है।बाजारों में यदा-कदा दिख रही जामुन सौ से सवा सौ रुपए प्रति किलोग्राम बिक रही है।

जामुन की छाल, पत्तियां, फल एवं गुठली आदि का प्रयोग मनुष्य को कई बीमारियों से बचाता है। मधुमेह, पीलिया, पथरी, बवासीर, लिवर की बीमारी, उल्टी, पेचिश, दस्त मोतियाबिंद तथा त्वचा संबंधी अनेक रोगों में इसके पत्ते, छाल एवं गुठली लाभकारी होते हैं।

जामुन में जल, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खनिज लवण, वसा, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, विटामिन ए, बी, सी, गैलिक एसिड आदि प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। पके जामुन के प्रति 100 ग्राम गूदे में लगभग 83 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। इसकी गुठली में जम्बोलीन नामक ग्लूकोसाइड पदार्थ होता है, जो शरीर के स्टार्च को शक्कर के रूप में परिवर्तित होने देता है। जिससे मधुमेह रोगियों के लिए यह अमृत समान होता है। इसे खाना खाने के बाद खाना उचित होता है। साथ ही जामुन खाने के तुरंत बाद दूध पीना नुकसानदायक हो सकता है।

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