वाराणसी : नये दरोगा जी के आते ही फिर चालु हो गया दुर्गाकुंड में अवैध ऑटो स्टैंड, फिर शुरू हुई टेम्पो और टोटो वालो से स्टैंड के नाम पर अवैध वसूली

शाहीन बनारसी

वाराणसी। शहर के दिल में स्थित दुर्गाकुंड इलाके में बहुचर्चित अवैध ऑटो और टोटो स्टैंड का सञ्चालन एक बार फिर से नए चौकी इंचार्ज के आते ही दुबारा शुरू हो गया है। एक बार फिर खुद को ऑटो स्टैंड का मालिक बताने वाले मंगल यादव द्वारा इन ऑटो और टोटो वालो से अवैध वसूली शुरू हो चुकी है। एक तरफ नगर निगम ने इस ऑटो स्टैंड का लाइसेंस ही नही रिनिव किया है। मगर अवैध वसूली यहाँ ऑटो स्टैंड के नाम पर जारी है। शायद मंगल यादव के यह बात दिमाग में होगी कि ऑटो स्टैंड अवैध है इसकी जानकारी नए चौकी इंचार्ज को नही है और सूत्र बताते है कि नए दरोगा जी के आते ही उसने ऑटो स्टैंड पर फिर से वसूली और ऑटो स्टैंड का सञ्चालन शुरू कर दिया है।

दरअसल, ये वही ऑटो स्टैंड है जहा से ऑटो और टोटो वालो से अवैध वसूली करने वाले मंगल यादव ने तत्कालीन चौकी इंचार्ज प्रकाश सिंह पर वसूली के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था। अन्दर खाने की बात ये रही कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने अवैध रूप से संचालित होने वाले इस ऑटो स्टैंड के नाम पर वसूली करने वाले मंगल यादव पर पुलिस सख्त हुई थी और ऑटो स्टैंड से वसूली रोक दिया गया था। इस सम्बन्ध में पुलिस ने मंगल यादव का भी दफा 34 का चालान किया था, जिसमे उसकी सुपुर्दगी मामले में पैरवी करने थाने पर पहुचे स्थानीय पत्रकार रामू पाण्डेय ने लिया था। इस सम्बन्ध में हमारी रामू पांडे से भी बात हुई थी और उन्होंने बात की पुष्टि किया था।

दुर्गाकुंड ऑटो स्टैंड प्रकरण (भाग – 2) – अवैध ऑटो स्टैंड संचालन में हमसे जो टकरायेगा, ऐसा लांछन लगायेगे कि देखता रह जायेगा……………

बहरहाल, हम यहाँ बात केवल अवैध रूप से संचालित होने वाले ऑटो स्टैंड की कर रहे है। नगर निगम यहाँ  “न खाता, न बही, जो नगर निगम कहे बस वही सही” के तर्ज पर काम कर रहा है। आइये इस शब्द के साक्ष्य सहित बात करते है। हम आपको एक बार फिर ध्यान दिलाते चले कि नगर निगम अपनी संपत्ति पर ऑटो स्टैंड का लाइसेंस देता है। मगर दुर्गाकुंड ऑटो स्टैंड के लाइसेंस की बात इसके एकदम विपरीत है। नगर निगम यहाँ दुसरे की सपत्ति पर लाइसेंस जारी कर रहा है। कारण ये है कि जिस जगह नगर निगम ऑटो स्टैंड बनाने का लाइसेंस पास कर नक़्शे के आधार पर देता है वह संपत्ति नगर निगम की न होकर शिया वक्फ बोर्ड की सपत्ति है। जिसके ऊपर ऑटो स्टैंड बनाने का अधिकार नगर निगम को है ही नही और उच्चाधिकारी इस ऑटो स्टैंड को हटाने के लिए कई बार पत्राचार कर चुके है। मगर बात फिर वही, “न खाता, न बही, बस नगर निगम जो कह दे वही सही।

दुर्गाकुंड मंदिर के ठीक सामने पश्चिम जानिब एक शिया इमामबाड़ा है। ये इमामबाड़ा शिया वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और इसका पंजीकरण संख्या 2048-A है। वर्ष 1997 से पूर्व इस इमामबाड़े की संपत्ति जो बाहर चबूतरे के तौर पर है, उस पर कथित ऑटो चालको द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया था। जिसके सम्बन्ध में इमामबाड़े के तत्कालीन मुतवल्ली ने इस सपत्ति पर अवैध कब्ज़े के मुखालिफ उच्चाधिकारियों को संज्ञान देते हुवे शिया वक्फ बोर्ड को शिकायत भेजी। शिया वक्फ बोर्ड ने बकायदा नियमो के तहत हर प्रकार से जाँच कर हर एक को उसका पक्ष रखने की नोटिस जारी करने के बाद मामले में 14 मार्च 1999 में आदेश जारी किया और घोषित किया कि शिया वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर ये अवैध औटो स्टैंड संचालित करके संपत्ति पर कब्ज़ा किया जा रहा है। जिसकी प्रति मंडलायुक्त वाराणसी को प्रेषित किया गया और कार्यवाही हेतु निवेदन किया गया।

इस आदेश के बाद तत्कालीन वाराणसी मंडलायुक्त ने तत्कालीन जिलाधिकारी को आदेशित कर अवैध टेम्पो स्टैंड हटाने को निर्देशित किया। यहाँ से शुरू हुआ कागज़ी घोड़े दौड़ना और दौडाना। नगर निगम इस कागज़ी घोड़े दौडाने एम् मास्टर डिग्री होल्डर शायद है। ये पत्र कहा किस फाइल में धुल खा रहा है ये या तो भगवान जाने अथवा नगर निगम के ज़िम्मेदार जाने। इसके बाद शिया वक्फ बोर्ड ने एक और पत्र मंडलायुक्त वाराणसी को पत्रांक संख्या 153 दिनांक ३ मई 2000 को जारी किया और ऑटो स्टैंड हटवाने की बात कही। ये भी पत्र शायद किसी दफ्तर की धुल फांक रहा है। इसके बाद अपर आयुक्त के पत्रांक संख्या 359(3)/अ0व0आ0 दिनांक 7 अगस्त 2000 को जारी हुआ। फिर मंडलायुक्त वाराणसी ने इस सम्बन्ध में 896/21-1(2012-15) दिनांक 7 अगस्त 2000 को जारी हुआ और निर्देश दिले।

मगर अनुपालन का क्या है, नगर निगम को कागज़ी घोड़े ही दौड़ना है तो दौड़ते रहेगे। कागज़ी घोड़े की रफ़्तार में वर्ष 2012 आ गया और नगर निगम ने एक क्रांतिकारी कार्यवाही किया तथा नए नक़्शे को बनवा कर नया लाइसेंस जारी कर दिया। इस नक़्शे में प्रदर्शित क्या गया कि दस ऑटो वक्फ संपत्ति के ऊपर खडी होगी और तीन ऑटो सड़क पर सवारी के भरने के लिए खडी होगी। इस नक़्शे के लिए भी मुत्वाल्लियाँन ने जमकर पत्राचार किया मगर नतीजा सिफर रहा। ये सब कुछ तब हुआ जब मंडलायुक्त वाराणसी ने अपने पत्रांक संख्या 1812/एसटी आयुक्त/2008 दिनांक 23 अप्रैल 2008 को सख्त निर्देश दिया था कि ऑटो स्टैंड हटा लिया जाए। मगर नगर निगम खुद में अपनी हुकूमत चलाने की जिद्द पाल बैठा था। वो कहा सुनने वाला किसी का भी आदेश।

बहरहाल, वर्ष 2012 में बने नक़्शे के विरोध में क्षेत्रीय नागरिको और मुत्वल्ली द्वारा शिकायतों का सिलसिला जारी रहा और ये बदस्तूर आज तक जारी है। मगर नगर निगम को भी जिद्द है कि “हम ऑटो स्टैंड तो यही बनायेगे। तो बनायेगे।” रोक भी कौन सकता है नगर निगम को। इसको हम नही बल्कि नगर निगम की कार्यशैली से समझा जा सकता है। तत्कालीन मंडलायुक्त वाराणसी ने अपने पत्रांक सख्या 8961/21-1 (2012-15) स्वा०नि०क० के द्वारा दिनांक 7 अगस्त 2014 को एक बार फिर सख्त निर्देश जारी किया जिसके तहत इस अवैध ऑटो स्टैंड को तत्काल हटाने की बात कही। मगर नगर निगम का तत्काल आज तक नही हुआ और अवैध ऑटो स्टैंड आज भी चल रहा है। अब तो नगर निगम ने हमारी पुरानी खबर का संज्ञान लिया और लाइसेंस रिनिवल भी नही किया है। मगर सूत्र बताते है कि मंगल यादव यहाँ सुबह और शाम आकर वसूली करता रहता है।

चौकी इंचार्ज साहब ने पदभार ग्रहण करते ही किया मंगल यादव से मुलाक़ात

सूत्र बताते है कि कबीरचौरा चौकी से पूर्व चेतगंज चौकी पर रहे दुर्गाकुंड के नए चौकी इंचार्ज प्रीतम तिवारी ने यहाँ पदभार ग्रहण करते ही जुगाड डॉट काम के लोगो से मुलाकात किया। इसमें मंगल यादव भी शामिल था। हमारी बात को तरजीह न दे विभाग वह पुलिस चौकी पर लगे CCTV फुटेज की जाँच खुद कर ले। जो लोग चौकी पर आकर कल दरोगा जी से मुलाक़ात करके गए है वह खुद नही बता सकते है कि आखिर दरोगा जी से किस काम के सम्बन्ध में मिले है। भले वह ऑटो स्टैंड के नाम पर रकम उतारने वाला मंगल यादव हो अथवा हुक्काबार चलाने वाले हो। बहरकैफ, हमको इससे क्या मतलब है। फोटो बताता है कि ऑटो स्टैंड चालु है। (तारिक आज़मी के पोस्ट से साभार)

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