घाघरा के बढ़ते जलस्तर से चिंतित तटवर्तिया इलाके के निवासी

उमेश गुप्ता

बिल्थरारोड(बलिया): लगभग चार दिनों खतरे के निशान से एक मीटर से ऊपर बहने वाली घाघरा नदी की उफनती लहरों ने तटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दिया है। तटवर्ती गांवों में नदी का पानी पहुँच गया है। गांवों में नाव चल रही है। बरहज में बना पीपा का पुल टूटकर नदी की धार में बहता मिला। घाघरा नदी के तांडव को देखते हुए शुक्रवार को जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल तथा एसपी राजकरन नैय्यर ने हल्दिरामपुर रेगुलेटर,  तुर्तीपार, टगुनिया, हाहानाला का पहुँचकर निरीक्षण किया। वही उपजिलाधिकारी दीपशिखा सिंह ने नाव पर बैठकर टन्गुनिया गांव का निरीक्षण किया। इस दौरान डीएम और एसपी ने प्रभावित बाशिंदों को हर सम्भव मदद का भरोसा दिया।

नदी के बढ़ाव से तुर्तीपार शमशान घाट भी पूरी तरह से डूब गया है। शमशान के डूब जाने की स्थिति में लोग बंधे पर ही मृतकों का अंतिम संस्कार करने को विवश हैं। लगभग आधा दर्जन गांवों में घाघरा की उठती लहरों से क्षेत्र में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। तटवर्ती इलाकों की तरफ नदी का बढ़ना जारी है। नदी के पानी ने तटवर्ती गांव और खेतों में खड़ी फसल पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। किसान फसल के नुकसान को लेकर परेशान हैं। नदी के कहर से तुर्तीपार स्थित शमशान घाट भी अछूता नहीं रह सका है तथा वह भी पूरी तरह पानी में डूब चुका है। शमशान घाट के साथ ही उसके मार्ग पर भी पानी बहने से लोगों को अपना जूता हाथ में लेकर पानी में चलना मजबूरी बन गई है। शव की अंत्येष्टि के लिए लकड़ियां ले जाना भी लोगों के लिए कठिन हो गया है। अब शमशान घाट का बंधे पर ही मृतकों की अंत्येष्टि जारी है।

प्रशासन इस मामले में उदासीन है। रात को शमशान घाट के बंधे पर लगी सोलर लाइट ही लोगों को रास्ता दिखा रही है। तुर्तीपार, हाहानाला, राजभर बस्ती टगुनिया, गुलौरा गांव, मुजौना के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है जिससे ग्रामीणों को घोर फजीहत उठानी पड़ रही है। पशुपालकों के सामने पशुओं का भूसा भींग जाने के चलते पशुओं को चारे की दिक्कत हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शुक्रवार की शाम 5 बजे नदी का जलस्तर 65.570 मीटर दर्ज किया गया। जो खतरे के निशान 64.010 मीटर से 1.56 सेमी ऊपर रिकार्ड किया गया। आयोग के अनुसार नदी का पानी एक-एक सेंटीमीटर प्रति घंटा के रफ्तार से बढ़ रहा है।

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