भगवान के नाम पर लड़ने वाले ही करते है भगवान का निरादर

कैमरा पर्सन अरुण कश्यप के साथ अमित कश्यप की रिपोर्ट
 जिन देवताओं की मूर्ति आप अपने घरो में बड़ी आस्था से स्थापित करते है।जिन देवताओं की मूर्ति के सामने आप नतमस्तक होकर अपने घर की अपने परिवार कुशलता की प्रार्थना करते है।अपने व्यापार में बढ़ोत्तरी के लिये गिडगिडाते है।काम निकल जाने के बाद इन मूर्तियों का इतना बुरा हाल करते है।मानो अपने घर से भगवान को नही दुश्मनों को निकाल फेंका हो।गंगा पुल के प्रवेश द्वार पर आपको कई मूर्तियाँ कूडे के ढेर की शक्ल में आपको दिखाई देंगी।

किसी भी धर्म में ऐसा नही देखा गया।कैसी मानसिकता है हिंदु धर्म की जहाँ एक ओर तो वो राम मंदिर निर्माण लिये मरने मारने को तैयार है वही दूसरी ओर पुरानी मूर्तियों को सड़को पर फेक देता है। कितनी ही गाडियां इन मूर्तियों को रोज़ रोंद्ती है।
गणेश महोत्सव और दिवाली के बाद मूर्तियों का होता है बुरा हाल
मै भी हिन्दू धर्म का पालन करता हूँ क्योंकि मै खुद हिंदू हूँ।पर उस समय बड़ा दुख होता है जब पुरानी मूर्तियों को कूडे के ढेर में तब्दील कर दिया जाता है।
क्या सोचता होगा हमारा भगवान हमारे बारे में कितना खुदगर्ज है हमारा भक्त जो साल भर तो हमसे रोज़ रो रो कर अपनी और अपने परिवार की सलामती की दुआ करता है।और काम निकल जाने के बाद  हमे ही सड़को पर फेक देता है।हा अब ये सम्भव भी है क्योंकि खुद भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है।की जब कलयुग आयेगा तो धर्म की हानि होगी ।

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