प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद, खाकी भी नहीं सुरक्षित,बिजनौर में दरोगा की हत्या

करिश्मा अग्रवाल.
बिजनौर. उत्तर प्रदेश में नई सरकार ने 100 दिन पुरे कर लिए है. चुनावी वायदों में गुंडा मुक्त राज का वायदा करने वाली सरकार ने वोट तो गुंडा मुक्त समाज के नाम पर पा लिया है मगर प्रदेश में आपराधिक
घटनाओं पर विराम नहीं लग पा रहा है। अपराध अपने चरम पर है. आम नागरिक को निशाना बनाने वाले बदमाश अब खाकी को भी निशाना बनाने से नहीं चुक रहे है. इसकी एक बानगी आज शुक्रवार को शाम के समय बिजनौर में देखने को मिली जब जिले के
मंडावर थाना अंतर्गत बालावाली चौकी इंचार्ज सहजोर सिंह की गला काटकर हत्या
कर दी गई। उनका क्षत विक्षत शव एक खेत में पड़ा मिला. शव के पास से उनकी सर्विस पिस्टल भी गायब थी। सूचना मिलते ही पुलिस
महकमे में हड़कंप मच गया। समाचार लिखे जाने तक मौके पर क्षेत्राधिकारी पहुच चुके थे और उच्चाधिकारी मौके के लिए रवाना हो चुके थे. चर्चाओ के अनुसार हत्या के पीछे खनन माफियो का हाथ होने की बात सामने आ रही है।

घटना के सम्बन्ध में प्राप्त प्रारंभिक सुचना के अनुसार सहजोर सिंह शुक्रवार शाम मंडावर थाने में कुछ
जरूरी कागजात जमा कर रवाना हुए थे। शाम छह बजे तक उन्हें मंडावर में ही
देखा गया था। इसी बीच अँधेरा होने के समय पानी लगाने ट्यूबवैल जा रहे ग्रामीणों ने
उनका क्षत विक्षप्त शव कांच की फैक्ट्री से 200 मीटर दूर खेत में पड़ा देखा। किसी अनहोनी की आशंका से ग्रस्त ग्रामीणों
ने वर्दी में पड़े शव को देखकर तत्काल थाना पुलिस को सूचना दी कि बालावाली चौकी
इंचार्ज सहजोर सिंह लहूलुहान पड़े हैं। उनकी बाइक सड़क पर मंडावर रोड पर
पड़ी हुई है। सुचना पर थाना पुलिस में हड़कंप मच गया। वहां से उच्चाधिकारियों को
सूचना दी गई। जिला मुख्यालय से जिलाधिकारी बिजनौर और पुलिस अधिक्षक सहित कई अन्य अधिकारी तुरंत ही मौके के लिए रवाना हो
गए। प्रत्यक्षदर्शियो के अनुसार
शव से ही कुछ दूर एक पाठल पड़ा हुआ था जिस पर खून लगा है। जहां
हत्या हुई वह खादर का इलाका थाने से लगभग 8 किमी दूर है। इसके पास ही
बालावाली गंगा पुल बिजनौर और हरिद्वार को जोड़ने वाला पुल है। अंग्रेजों के
जमाने के इस पुल पर यातायात कुछ
समय पूर्व ही शुरू किया गया है। आज भी इस पुल पर भारी वाहनों का प्रवेश निषेध है। बताया जाता है कि गंगा के रेत का खनन यही से होता है। इसी कारन यह आशंका
व्यक्त की जा रही है कि हत्या के पीछे खनन माफिया का हाथ हो सकता है।
पहले भी हो चुकी है खाकी हमलो की शिकार
  • 6
    अप्रैल को आगरा के शमसाबाद इलाके में ड्यूटी पर तैनात सिपाही अजय यादव को
    बदमाशों ने गोली मार दी थी। घायल सिपाही ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम
    तोड़ दिया था। 
  • 8 अप्रैल को भी बदमाशों प्रतापगढ़
    जिले में एक सिपाही की गोलीमार हत्या कर दी थी।

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