जम्मू-कश्मीर में नई राजनीतिक पार्टी का क्या है उद्देश्य और किसके इशारे पर बनी है “अपनी पार्टी

भारत के लोकतंत्र पर कैसा ख़तरा मंडरा रहा है 

: इधर काफ़ी दिनों से लगातार यह ख़बरें आ रही थीं कि कश्मीर में एक नई पार्टी का गठन होने जा रहा है, नई पार्टी इस राज्य के छीने गए विशेष दर्जे को वापस दिलाएगी और कश्मीर में जारी राजनीतिक संकट को भी दूर करेगी। ख़ैर वह दिन भी आ गया कि कश्मीर में “अपनी पार्टी” के नाम से एक नए दल का एलान हो गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री अल्ताफ़ बुख़ारी ने क़रीब 30 नेताओं के साथ नई पार्टी के गठन का एलान किया है। महबूबा मुफ़्ती की पार्टी पीडीपी में रह चुके और इस राज्य का वित्त मंत्री पद संभाल चुके अल्ताफ़ बुख़ारी ने नया राजनीति संगठन बनाने का एलान किया है। इस संगठन का नाम “जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी”(जेकेएपी) रखा गया है। इस पार्टी में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के 30 अन्य नेता भी शामिल हुए हैं। बुख़ारी “जेकेएपी”  के अध्यक्ष चुने गए हैं उनका कहना है कि पार्टी का एजेंडा जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करवाना है। पार्टी के एलान के बाद बुख़ारी ने पत्रकारों से कहा कि,  हम पर बहुत सारी ज़िम्मेदारियां हैं क्योंकि यहां उम्मीदें और चुनौतियां बहुत अधिक हैं। उन्होंने कहा कि, मैं जम्मू और कश्मीर के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि मेरी इच्छाशक्ति मज़बूत है। हालांकि बुख़ारी ने कहा कि राज्य में जल्द चुनाव को लेकर उन्हें कम उम्मीद नज़र आती है। इस नई पार्टी में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस, बीजेपी समेत अन्य दलों के नेता भी शामिल हुए हैं।
वैसे जहां जम्मू-कश्मीर के पूर्व तीन मुख्यमंत्रियों सहित इस राज्य के कई प्रमुख नेता फिलहाल 5 अगस्त 2019 से हिरासत में हैं वहीं ऐसी स्थिति में इस राज्य में नई पार्टी के गठन होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कश्मीर टाइम्स की एडिटर अनुराधा भसीन कहती हैं, “कश्मीर में लोकप्रिय नेतृत्व को ख़त्म करके और कठपुतली नेताओं का आगे करना का इतिहास पुराना है और यह उसी श्रृंखला की एक कड़ी है। जहां इस राज्य के विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को समाप्त करने के बाद मोदी सरकार ने कश्मीर के प्रमुख नेताओं को महीनों से अपनी हिरासत में रख रखा हो वहीं एक नई पार्टी के गठन की इजाज़त देना यह एक तरह का दिल्ली सरकार का दिखावटी हथकंडा है। जिससे वह दुनिया को यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि कश्मीर में सबकुछ ठीक है। क्योंकि कश्मीर में राजनीति गतिविधियां बंद होने से मोदी सरकार की चौतरफ़ा तौर पर काफ़ी आलोचना हो रही है और कश्मीर में नई पार्टी का गठन कराकर वह दुनिया को दिखाने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी कर रही है।

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