इंसाफ की जीत: दालमंडी के सराय हड़हा की 7 वर्षीय अनाया के मौत को मिलेगा इन्साफ, अदालत ने दिया डॉक्टर्स के खिलाफ FIR दर्ज करने का हुक्म

शफी उस्मानी

वाराणसी: ASG Eye Hospital में 7 वर्षीय अनाया रिज़वान की रेटिना सर्जरी के दौरान हुई मौत के मामले ने बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी ने इस प्रकरण में FIR दर्ज करने का आदेश देते हुए थाने को निष्पक्ष विवेचना शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने मामले में कई गंभीर चिकित्सकीय लापरवाहियों का उल्लेख किया है।

बताते चले कि दालमंडी के सराय हड़हा निवासी रिजवान की पुत्री अनाया को 14 अक्टूबर 2025 के रोज़ ASG हॉस्पिटल में रेटिना की सर्जरी हेतु स्वस्थ अवस्था में सर्जरी हेतु ASG हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। दौरान सर्जरी अनाया की हालत बिगडती गई और अस्पताल प्रबंधन ने जब मरीज़ मरणासन्न अवस्था में पहुच गया तो हाथ खड़े करते हुवे मरीज़ को अन्यंत्र दिखाने के लिए परिजनों को कह दिया। अदालत ने इस बात को प्रमुख रूप से उल्लेख करते हुवे कहा है कि आपरेशन के दौरान मरीज़ की बिगड़ी हालत, बिना कारण बताए दूसरे अस्पताल भेजा गया। जबकि 14 अक्टूबर 2025 को अनाया को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में ASG Eye Hospital में भर्ती कराया गया था।

अदालत ने प्रमुखता से जिन बिदुओ पर गौर किया उसमे सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया देने के बाद अचानक उसकी स्थिति बिगड़ने और बिना स्पष्ट कारण बताए उसे Matcare Hospital, महमूरगंज भेजा जाना, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अदालत ने एनेस्थीसिया की खुराक, ऑक्सीजन सप्लाई, पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग और रेसुसिटेशन की देरी को गंभीर लापरवाही माना है। इसके साथ ही एनेस्थीसिया चार्ट, ICU रिकॉर्ड, ऑपरेशन नोट्स और CCTV फुटेज न उपलब्ध कराए जाने को अदालत ने “संदिग्ध” बताया है। डॉक्टरों के बयानों में भी कई विरोधाभास पाए गए।

पीड़ित परिवार ने अपने प्रार्थना-पत्र में मांग की है कि विवेचना की निष्पक्षता के लिए उनके अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी को स्वतंत्र सहयोगी/ऑब्जर्वर के रूप में जांच से जोड़ा जाए। परिवार का कहना है कि साक्ष्यों की सुरक्षा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है। डॉ0 प्रत्युष रंजन के सोशल मीडिया पोस्ट पर आफरीन का अलग परिवाद मामले ने एक नया मोड़ तब लिया जब अनाया की मां आफरीन रिज़वान ने डॉक्टर प्रत्युष रंजन के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अदालत में अलग परिवाद दायर किया है।

वाराणसी CMO साहब, आँख का आपरेशन और मौत..! ये कभी नही सुना, ASG आई हॉस्पिटल के डाक्टरों की लापरवाही पर आप खामोश क्यों? क्या दालमंडी की मासूम बच्ची अनाया के मौत का इन्साफ नहीं मिलेगा ?

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि डॉक्टर ने अपने पोस्ट के माध्यम से—पत्रकारों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पुलिसकर्मियों, जनप्रतिनिधियों और पीड़ित के समर्थन में खड़े आम नागरिकों पर अनर्गल आरोप लगाए और न्याय की लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश की। आफरीन ने इसे ‘दबाव बनाने और छवि धूमिल करने का प्रयास’ बताया है। साथ ही डॉ0 रंजन पर एक और आरोप यह है कि वे सरकारी योजनाओं का प्रचार अपने निजी अस्पताल व व्यावसायिक गतिविधियों में ‘पब्लिसिटी टूल’ की तरह कर रहे थे। इसी को लेकर उन्हें एक लीगल नोटिस भेजा गया था, परंतु अब तक उसकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन और न्यायपालिका पर जताया भरोसा, अनाया का परिवार प्रधानमंत्री व वाराणसी सांसद नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा है कि पुलिस निष्पक्ष विवेचना कर कठोर कार्रवाई करेगी, जिससे यह मामला समाज में एक मिसाल बने। परिवार ने कहा कि डॉक्टरों द्वारा लापरवाही करने से पहले ‘100 बार सोचना पड़े’—ऐसा सख्त संदेश जाना चाहिए।

अधिवक्ताओं के सहयोग को पीड़ित परिवार ने ‘बड़ी जीत’ बताया है। अधिवक्ताओं में शशांक शेखर त्रिपाठी, राजेश त्रिवेदी, आशुतोष शुक्ला, राजकुमार तिवारी, आशुतोष सक्सेना, दीपक वर्मा तथा उनकी कानूनी टीम के प्रति आभार जताया है। आफरीन बानो का कहना है कि पत्रकारों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों का सहयोग आगे भी जारी रहेगा, और यह संघर्ष न्याय की अंतिम मंज़िल तक पहुंचने तक जारी रहेगा।

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