पुलिस बहाये पसीना, ताकि रहे आप सुरक्षित, मगर जिया रजा बनारस, खूब घूम के करा खरीदारी

ए जावेद

वाराणसी। कोरोना का कहर देश में बरपा है। प्रदेश के हर एक शहर से लेकर गाव तक इसकी चपेट में आता जा रहा है। शासन के द्वारा इसकी चेन तोड़ने के लिए लॉक डाउन का आप्शन चुना गया है। लॉक डाउन जो पहले आज सुबह यानि 10 मई को समाप्त हो रहा था को बढ़ा कर 17 मई की सुबह 7 बजे तक कर दिया गया है। इस लॉक डाउन में सरकार द्वारा आवश्यक वास्तुओ की दुकानों को खोलने के लिए नियमो में थोड़ी ढील दिया है। रिक्शे और ई-रिक्शा और ऑटो भी प्रतिबंधो के साथ चल रही है।

इस सबके बीच पुलिस लॉक डाउन का पालन करवाने के लिए अपने पसीने बहा रही है। दिन की फिक्र है न रात की चिंता। खुद को खतरे में डाल कर लॉक डाउन के पालन हेतु लोगो पर सख्त रवैया भी कुछ जगहों पर दिखा रही है। मगर बनारस है कि घुमने और खरीदारी करने से बाज़ नही आ रहा है। काम हो चाहे न हो, उठाई गाड़ी और निकल पड़े देखने की शहर का हाल क्या है। भीड़ जुटाने में भी बनारस पीछे कहा रहने वाला है। एक तरफ से अगर पुलिस आ रही है तो उसको देख कर थोडा हट बढ़ गए। जाते ही दुबारा भीड़ लगा कर खरीदारी शुरू हो जाती है।

हालात ऐसे होते जा रहे है कि कोरोना के कहर को लोग मज़ाक समझने लगे है। उनको लगता है कि शहर में सब कुछ भले ख़राब हो वो सुपर पॉवर अपने अन्दर रखकर चल रहे है। उनको तो कोरोना पकड़ ही नही सकता है। कई बनारसियो को तो शायद इसका भी गुमान है कि उनको अगर कोरोना मिल गया तो “गुरु पटक के मारब कोरोन्वा के, ससुरा सिद्धेय चीन भागी।” ऐसा लगता है कि इनके डर से कोरोना इनके आसपास तो छोड़े इनके इलाके में भी नही आएगा।

यही नही बल्कि भीड़ दुसरे को समझाती दिखाई दे जाएगी। धार्मिक आस्था सामने ले आएगी। पूछे तो कहेगे कि जीवन मृत्यु ईश्वर के हाथ में है। तो गुरु एक काम करो, इतनी आस्था है इतना एतबार है तो जाओ बुर्ज खलीफा से कूद कर देखो। ईश्वर चाहेगा तभी मरोगे, भ्रम टूट जायेगा गुरु और ईश्वर चाहेगा फिर। कुछ दिमाग लगा लो। उसी इश्वर का दिया हुआ दिमाग है। गोलगप्पा कुछ दिन नहीं खाने से दुबले नही हो जाओगे। सुरक्षित रहे। स्वस्थ रहे। घरो में रहे। दो गज की दुरी मास्क है ज़रूरी को समझे। मास्क बिना लगाये, पुलिस को देख कर बनियान में मुह छुपा लेने से कोरोना हो न हो, गुरु इन्फेक्शन पसीना से ज़रुरे हो जाई। फ्री में मास्क बाटने वाले आज आपको भले बेवकूफ दिखाई दे रहे होंगे मगर जरा उनसे मुलाकात कर ले जिन्होंने अपने परिवार के सदस्य इस महामारी में खोये है।

कभी कोरोना वारियर के तरीके से काम कर रहे डाक्टरों, पुलिस कर्मियों, पत्रकारों के दिल से पूछे जाकर। काम के बाद घर जाने पर खुद के बाल-बच्चो से दुरी बनाये रखते है ताकि वो सुरक्षित रहे। ये ऐसा इस लिए है क्योकि आप सुरक्षित रहे। मगर आप है कि आपको भीड़ ज़रूर लगानी है। आज विशेश्वरगंज में घी खरीदते लोगो की भीड़ देखा। डर लगा उनका फोटो तक बनाने में। अमा कमाल करते हो मिया, क्या शुद्ध देसी घी उसी प्रतिष्ठित दूकान से खाने में ही आपकी जिद्द है तो पूरी करे आप। आखिर आपको अपने परिवार की फिक्र नही है तो हम आपको कैसे समझा सकते है दोस्त। फिर भी कहते है। दो गज की दुरी, मास्क है ज़रूरी।

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