जाने कौन है लेडी डॉन मैडम मिज़ जो बनने जा रही है कुख्यात गैंगेस्टर काला जठेडी की शरीक-ए-हयात, पढ़ी लिखी अनुराधा कैसे बनी ‘मैडम मिज़’ ‘रिवाल्वर रानी’, और कौन है दहशत का दूसरा नाम काला जठेडी

तारिक़ आज़मी

डेस्क: दहशत का दूसरा नाम काला जठेड़ी जिसको पुलिस हथकड़ी पहनने के लिए काफी लम्बे वक्त तक परेशान थी और उसको सलाखों में कैद करने के लिए कई बार फैलाए जाल से वह निकल गया था। अब लेडी डॉन मैडम मिज़ की कैद में हमेशा के लिए जाने वाला है। कुख्यात गैंगेस्टर काला जठेड़ी की शादी जरायम की दुनिया की लेडी डॉन ‘मैडम मिज़’ यानी ‘रिवाल्वर रानी’ से होने वाली है। एक पढने लिखने वाली अनुराधा चौधरी से लेडी डॉन ‘मैडम मिज़’, ‘रिवाल्वर रानी’ के सफ़र को किसी फ़िल्मी जीवन से कम नही देखा जा सकता है।

अनुराधा चौधरी सीकर जिले के फतेहपुर के पास गांव अलफासर में जन्मी थीं। उसने चामड़िया कॉलेज से बीसीए किया। इसके बाद एमबीए किया। अनुराधा के पिता सरकारी नौकरी में थे। कालेज में उसकी दोस्ती दीपक मिंज से हुई। दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा। आखिरकार दोनों ने शादी कर ली। अनुराधा और दीपक मिंज दोनों ही शेयर मार्केट में पैसे लगाते थे, लेकिन उस वक्त अनुराधा का नाम करोड़ों रुपए की ठगी में सामने आया था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक वो कई अपराध करती चली गई। जरायम की दुनिया में उसको ‘मैडम मिज़’ और रिवाल्वर रानी के नाम से भी पुकारा जाता है।

दरअसल, अनुराधा चौधरी को अपने ऊपर से कर्ज उतारना था और पैसे कमाने थे। इस वजह से उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। इस दौरान उसके कई गैंगस्टरों से संपर्क हो गया थे। उनमें से एक था बलवीर बानूड़ा। अनुराधा हिस्ट्रीशीटर बलवीर बानूड़ा के जरिए राजस्थान के नामी गैंग्स्टर आनंदपाल सिंह से मिली। अनुराधा फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती थी और आनंदपाल का अंग्रेजी में हाथ तंग था। तब आनंदपाल ने अनुराधा से अंग्रेजी बोलना सिखाने का वायदा करवाया और दोनों अंग्रेजी सीखते-सीखते इश्क की पढ़ाई एक दुसरे से करने लगे।

जब आनंदपाल से अनुराधा की नजदीकियां बढ़ी तो दीपक मिंज ने उससे नाता तोड़ लिया। अनुराधा अपने पति को छोड़कर 2013 में आनंदपाल गैंग में शामिल हो गई। अनुराधा अब ‘मैडम मिज़’ और रिवाल्वर रानी बन चुकी थी और अनुराधा आनंदपाल के साथ लिव इन में रहने लगी। अनुराधा से मैडम मिज़ और रिवाल्वर रानी बनकर वह कितनी खतरनाक हो चुकी थी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2006 में हुए जीवणराम गोदारा हत्याकांड के मुख्य गवाह प्रमोद चौधरी के भाई इंद्रचंद का 2014 में अनुराधा ने ही अपहरण किया था। वह उसे लेकर पुणे चली गई थी। वहां उसे एक फ्लैट में बंधक बना लिया गया था।

आनंदपाल से अनुराधा ने एके 47 चलानी सीखी। अनुराधा चौधरी भी अपहरण और लाखों रुपए की वसूली की वारदातों में शामिल होने लगी। उसके खिलाफ अपहरण, मारपीट, जान से मारने की धमकियां देने सहित कई मुकदमें दर्ज हैं। 2017 में आनंदपाल का एनकाउंटर हो गया और इसी बीच अनुराधा भी पुलिस के हत्थे चढ़ गई। इसके बाद अनुराधा कई बार जेल गई और बाहर आई। जेल से छूटने के बाद अनुराधा दिल्ली जाकर रहने लगी। 2018 में वो लॉरेंस बिश्नोई गैंग के संपर्क में आई और इसके बाद काला जठेड़ी से उसकी मुलाकात हुई।

कहते हैं कि सीकर में गैंगस्टर राजू ठेहट की हत्या के बाद भी अनुराधा का नाम चर्चा में आया था। सीकर पुलिस ने उस पर पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। नागौर की जिला अदालत ने 2016 में अनुराधा को एक मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। 2020 में राजस्थान सरकार ने उस पर बीस हजार का इनाम घोषित किया था।

फिलहाल शादी की तैयारिया शुरू हो गई है। इस सिलसिले काला जठेड़ी ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कस्टडी पैरोल की मांगी की है, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। उसे 12 मार्च को दिल्ली में और 13 मार्च को सोनीपत हरियाणा में गृह प्रवेश के लिए छह घंटे की हिरासत पैरोल दी गई है। इस शादी पर सेंट्रल एजेंसियों समेत 4 राज्यों की पुलिस की नजर है। ये शादी 12 मार्च को दिल्ली में है। 13 मार्च को सोनीपत में गृह प्रवेश के लिए भी उसे पैरोल मिली है। काला और उसकी गर्लफ्रेंड को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जुलाई 2021 सहारनपुर से गिरफ्तार किया था। काला पर 7 लाख का इनाम था।

साल 2023 में अनुराधा ने एक इंटरव्यू में साफ कर दिया था कि अब उसका क्राइम से कोई लेना देना नहीं है, अब वो सिर्फ एक हाउस वाइफ है और संदीप उर्फ काला जठेड़ी का घर संभाल रही है। अनुराधा अब नॉर्मल जिंदगी जीना चाहती है और जी भी रही है।

कौन है काला जठेड़ी?

काला जठेड़ी का असली नाम संदीप उर्फ काला है। वो हरियाणा सोनीपत का रहने वाला है। काला जठेड़ी कैसे क्राइम की दुनिया में आ गया, ये आपको बताते हैं। उसने झपटमारी से क्राइम की दुनिया में एंट्री की। काला जठेड़ी के खिलाफ दिल्ली के समयपुर बादली में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी। 29 सितंबर 2004  को वो अपने साथियों के साथ सिरसपुर इलाके में एक शख्स का मोबाइल छीन कर भाग रहा था, तभी पुलिस ने उसे दबोच लिया था।

शुरुआत में काला जठेड़ी झपटमारी, लूटपाट और हत्या की कोशिश जैसी वारदातों को अंजाम दिया करता था, लेकिन धीरे-धीरे जठेड़ी ने अपना गैंग बना लिया और जबरन उगाही करने के साथ-साथ, वो विवादित संपत्तियों में दखल देने लगा। काला जठेड़ी पर दिल्ली पुलिस ने एक लाख का इनाम रखा था, लेकिन वो इतना कुख्यात बन गया कि हरियाणा पुलिस ने काला जठेड़ी की गिरफ्तारी पर सात लाख का इनाम घोषित किया हुआ था।

गैंगस्टर काला जठेड़ी, फरवरी 2020 में फरीदाबाद से पुलिस हिरासत के दौरान फरार हो गया था। जब पुलिस उसे तलाश कर रही थी, तब पुलिस के हत्थे चढ़े एक बदमाश नितीश कुमार ने पूछताछ में बताया था कि काला जठेड़ी हरियाणा में ही छुपा हुआ है। कभी दुबई तो कभी मलेशिया में बैठकर हिंदुस्तान में अपना गैंग ऑपरेट कर रहा था। इस तरह की बातें कही जाती है। हालांकि ऐसा भी कहा जाता है कि ये सब एजेंसियों को भ्रमित करने के उद्देश्य से भी कहा जाता था।

दिल्ली के चर्चित सागर धनखड़ हत्याकांड के बाद कुख्यात गैंगस्टर काला काला जठेड़ी का नाम सुर्खियों में आया था। पहलवान सागर धनखड़ के साथ हमले के वक्त मौजूद सोनू महाल गैंगस्टर काला जठेड़ी का रिश्तेदार है। सागर की हत्या का आरोप सुशील पर लगा था। इस वजह से काला जठेड़ी सुशील का दुश्मन बन गया था। रेसलर सुशील कुमार ने खुद को जान का खतरा बताया था। 4 और 5 मई की रात काला जठेड़ी का भांजा सोनू महाल सागर धनखड़ के साथ मौजूद था। मारपीट में सोनू महाल भी घायल हुआ था। जब ये बात काला को पता चली तो उसने सुशील से बदले लेने का प्लान भी बनाया था।

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