रेंज मझगई वन्य प्राणी सप्ताह में वन्य जीवों के संरक्षण पर ग्रामीणों को किया जागरूक

फारुख हुसैन

पलियाकलां-खीरी। हमारा यह भारतवर्ष संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है l हमारे देश में प्रत्येक दिन को महत्वता दी गई है l जिसे हम किसी न किसी रूप में मनाते है l इसी के चलते हमारे देश में अक्टूबर महीने की 2 से 8 तारीख तक वन्यजीव सप्ताह के रूप में मनाते है l वन्यजीव पर्यावरण का एक अभिन्न अंग है.हमारे देश के धन का गठन इन्ही से होता है. इसमें जंगली जानवर, पक्षी, पौधे आदि शामिल हैं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता में तेजी लाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।

कस्बे के मझगई रन्ज में वन्य प्राणी सप्ताह 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक उत्तर खीरी प्रभाग बफर जोन दुधवा टाइगर रिजर्व का कार्यक्रम का आयोजन व संयुक्त तत्वाधान में वन्य जीव प्राणी सप्ताह के अवसर पर 5 अक्टूबर को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मौके पर ग्रामीण क्षेत्रों के ग्रामप्रधान,समाज सेवी व सदस्यगण आदि सप्ताह प्रतियोगिता में भाग लिया वनक्षेत्राधिकारी सुभाष चन्द्र वर्मा ने बताया इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक समुदायों व परिवारों को प्रकृति से जोड़ना, मानव के अंदर संरक्षण की भावना पैदा करना, वन्यजीव व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जागरूक रहना, इस अभियान की उद्देशिका यह है ,की हमें हमेशा प्रत्येक वन्य-प्राणी,पशु -पक्षियों और पौधों को पूर्ण रूप से सुरक्षा प्रदान करना चाहिए , इसके लिए केन्द्र सरकार ने कुछ क्षेत्रों को अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी घोषित किया है l सरकार ने अधिनियम के तहत सभी जंगली जानवरों और पक्षियों आदि के शिकार पर रोक लगाईं ,और सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान भी रखा गया l

प्रकृति के अनुसार मानव,पर्यावरण और वन्यजीव एक दुसरे से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए है l मनुष्य के शरीर व मस्तिष्क को स्वस्थ रखने ,शुद्ध ऊर्जा प्राप्त करने के लिये हमारे पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना बेहद ही जरूरी है l पर्यावरण से ही मानव का जीवन सम्भव है ,और पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना है तो वन व वन्यजीवों की सुरक्षा करना जरूरी है l वन दरोगा राकेश शुक्ला ने बताया आज क्यों संकट में है जैव विविधता- हमने जिससे बहुत कुछ पाया,क्यों उन्हें सताते है l दुनिया में बेजुबान जीव-जंतु और वनस्‍पतियों पर खतरे के बादल मंडराते है l मानव हस्‍तक्षेप के द्वारा आज लगभग 41 हजार से भी अधिक जीवों की प्रजातियां विलुप्‍त होने की कगार पर पहुंच गई हैं l उनका जीवन संकट में पड़ने लगा है l ऐसा क्यों? क्या हम भूल बैठे है, की उनके न रहने से हमारा जीवन भी संकट में पड़ जाएगा ,प्रकृति का सारा सन्तुलन बिगड़ जाएगा.विलुप्‍त हो रही पशु पक्षी ,पेड़ -पौधों की प्रजातियों से प्रकति का सन्तुलन बिगड़ा तो मानव जीवन अस्त -व्यक्त हो जाएगा तब मानव के पास केवल पछतावा होगा न होगें पेड़-और पौधें न ही रह जायँगे ये जीवा और जंतु यदि अब भी हमारी आँखें खुल गई तो हम जैव विविधता के हो रहे ह्रास को दूर कर सकते है.हम जीव-जंतु और वनस्‍पतियों की रक्षा को अपना परम कर्तव्य मानकर आगे बढ़ें तभी विकास कर पायेगें l शरद मिश्रा ने बताया कि वन्यजीव सप्ताह क्यों मनाया जाता है –

वन्यजीवों के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व ही न रह जाएगा, उसका जीवन संकट में पड़ जायेगा. इसलिए वन्यजीवों के महत्व को समझने व इनके प्रति जागरूक रहने के लिए सम्पूर्ण विश्व में एक अभियान के रूप में वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है l वन्य जीवों की सुरक्षा के लिये प्रत्येक व्यक्ति को आगे लाने के लिए भारतीय वन्य जीव बोर्ड ने वन्यजीव सप्ताह मनाने का निर्णय लिया और तब से यह 2 से 8 अक्टूबर तक प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है l आज प्रकृति से जो भी प्राप्त हो रहा है l सबकी कुछ न कुछ महत्वता है l चाहे वह जीव हो या पेड़ -पौधे ,सभी एक दूसरे से जुड़े हुए है.आज यदि वृक्ष है तो ही मानव और प्राणियों का जीवन सम्भव है l इस कार्यक्रम वनरेंजस्टाप गजोधर टी.सी. अवधेश ,रोहित,सचिन विकास सक्सेना, समाज सेवी अख्तर खान, ग्रामप्रधान सत्यवान,अरविंद,सर्वेश कुमार,विनोद कुमार यसपाल सिंह आदि महजूद रहे l

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